Sunday, May 27, 2018

Breaking News

   कानपुर जहरीली शराब मामले में 5अधिकारी निलंबित     ||   अब जल्द ही बिना नेटवर्क भी कर सकेंगे कॉल, बस Wi-Fi की होगी जरुरत     ||   मौलाना मदनी ने भी की एएमयू से जिन्‍ना की तस्‍वीर हटाने की वकालत     ||   भारत-चीन सेना के बीच हॉटलाइन की तैयारी, LoC पर तनाव होगा दूर     ||   कसौली में धारा 144 लागू, आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर     ||   स्कूली बच्चों पर पत्थरबाजी से भड़के उमर अब्दुल्ला, कहा- ये गुंडों जैसी हरकत     ||   थर्ड फ्रंट: ममता, कनिमोझी....और अब केसीआर की एसपी चीफ अखिलेश यादव के साथ बैठक     ||   मायावती का पलटवार, कहा- सत्ता के अहंकार में जनता को मूर्ख समझ रही BJP; शाह के गुरू मोदी ने गिराया पार्टी का स्तर     ||   चीन के स्‍पर्म बैंक ने रखी अनोखी शर्त, सिर्फ कम्‍युनिस्‍टों का समर्थन करने वाले ही दान कर सकेंगे स्‍पर्म     ||   CBSE पेपर लीक: हिमाचल से टीचर समेत 3 गिरफ्तार, पूछताछ में हो सकता है अहम खुलासा     ||

आखिर क्यों फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तोड़ दी जाती है पेन की निब, जानें वजह

अंग्वाल न्यूज डेस्क
आखिर क्यों फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तोड़ दी जाती है पेन की निब, जानें वजह

नई दिल्ली। अभी तक आपने फिल्मों में यह देखा होगा कि अदालत से किसी कैदी या अपराधी को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जज पेन की निब को तोड़ देते हैं। आपको पता है कि ऐसा क्यों किया जाता है, नहीं, तो चलिए हम आपको बता देते हैं कि ‘हैंग टिल डेथ’ कहने के बाद पेन की निब क्यों तोड़ी जाती है। सबसे पहले आपको यह बता दें कि जज द्वारा ऐसा करने का प्रचलन सिर्फ भारत में ही है। 

गौरतलब है कि भारतीय कानून में अपराधी के दंड की सबसे बड़ी सजा फांसी है। रेयर ऑफ रेयरेस्ट केस में ही मुजरिम को फांसी की सजा सुनाए जाने का प्रावधान है। जिस भी व्यक्ति का अपराध जघन्य अपराध की श्रेणी में आता हो, उसे ही मौत की सजा सुनाई जा सकती है। ऐसे में अगर जज के द्वारा एक बार फांसी की सजा सुना दी जाती है तो उसे बदला नहीं जा सकता है, हां ऐसा करने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति का होता है। राष्ट्रपति अपने विवेक और ज्ञान के आधार पर अपराधी को क्षमा भी कर सकते हैं।  

ये भी पढ़ें - अमेरिका के एक रेस्टोरेंट ने तैयार किया वैलेंटाइल डे स्पेशल बर्गर, लाख रुपये चुकानी होगी कीमत


यही वजह है कि जिस पेन से मौत लिखा जाता है उसकी निब तोड़ दी जाती है। यह भी माना जाता है कि अगर फैसले के बाद पेन की निब तोड़ी जा चुकी है, तो इसके बाद खुद उस जज को भी यह अधिकार नहीं होता है की वो दोबारा उस फैसले को बदलने के बारे में सोच सके। पेन की निब टूट जाने के बाद इस फैसले पर दोबारा विचार भी नहीं किया जा सकता।

 

Todays Beets: