Sunday, January 21, 2018

Breaking News

   98 साल की उम्र में MA करने वाले राज कुमार का संदेश, कहा-हमेशा कोशिश करते रहें     ||   मुंबई स्टॉक एक्सचेंज ने पार किया 34000 का आंकड़ा, ऑफिस में जश्न का माहौल     ||   पं. बंगाल: मालदा से 2 लाख रुपये के फर्जी नोट बरामद, एक गिरफ्तार    ||   सेक्स रैकेट का भंड़ाभोड़: दिल्ली की लेडी डॉन सोनू पंजाबन अरेस्ट    ||   रूपाणी कैबिनेट: पाटीदारों का दबदबा, 1 महिला को भी मंत्रिमंडल में मिली जगह    ||   पशु तस्करों और पुलिस में मुठभेड़, जवाबी गोलीबारी में एक मरा, घायल गायें बरामद    ||   RTI में खुलासा- भगत सिंह-राजगुरु-सुखदेव को अब तक नहीं मिला शहीद का दर्जा, सरकारी किताब में बताया गया 'आतंकी'     ||    गुजरात चुनाव: रैली में बोले BJP नेता- दाढ़ी-टोपी वालों को कम करना पड़ेगा, डराने आया हूं ताकि वो आंख न उठा सकें    ||   मध्य प्रदेश: बाबरी विध्वंस पर जुलूस निकाल रहे विहिप-बजरंग दल कार्यकर्ता पर पथराव, भड़क गई हिंसा    ||   बैंक अकाउंट को आधार से जोड़ने की तारीख बढ़ी, जानिए क्या है नई तारीख    ||

अच्छी शिक्षा की कमी में पहाड़ो के स्कूल हो रहे खाली, कई स्कूलों में आते हैं मात्र 2-3 छात्र

अंग्वाल संवाददाता
अच्छी शिक्षा की कमी में पहाड़ो के स्कूल हो रहे खाली, कई स्कूलों में आते हैं मात्र 2-3 छात्र

देहरादून। जहां एक तरफ प्रदेश सरकार पहाड़ों से हो रहा पलायन रोकने को लेकर चिंता जाहिर कर रही है, वहीं दूसरी ओर बच्चों की परविश और अच्छी शिक्षा के चलते गांव खाली हो रहे हैं। गांव में बच्चों की मस्ती ओर शोर-शराबा के बजाय अब सनाटा सुनने को मिलता है। कई गांवों में अब न तो कोई बच्चा है और ना ही कोई जवान। रिपोर्ट के मुताबिक, अबतक चमोली जिले के 12 सरकारी स्कूल पर ताले लग गए है। गांव के बच्चे नजदीकी शहरों में इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने जा रहे हैं। स्कूल में बच्चें न होने का कारण प्राथमिक और जूनियर स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में चमोली के 9 विकासखंडों में कुल 972 प्राथमिक और 207 जूनियर स्कूल ही चल रहे हैं।

यह भी पढ़े- विदेश में पढ़ाई करने का सपना अब होगा पूरा, इन जगहों पर फ्री में मिलती है हायर एजुकेशन

 


इतना ही नहीं कई स्कूल ऐसे भी है जहां केवल 2-3 छात्र पढ़ने आते हैं। हर साल लगातार प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की कम होती संख्या के कारण सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर भी सवाल उठ रहा हैं। लोगों का कहना है कि गांव के स्कूलों में नियुक्त टीचर भी गांव में नही रहना चाहते हैं। वह शहरों में कमरे लेकर रह रहे हैं, जिसके कारण वह स्कूल देर से पहुंचते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित होती है। कुछ लोगों का तो कहना है कि सरकार को सरकारी स्कूलों का निजीकरण कर देना चाहिए।

 

यह भी पढ़े-  प्राईवेट स्कूलों को खाली सीटों की जानकारी पब्लिक करने का दिया गया आदेश

Todays Beets: