Thursday, October 18, 2018

Breaking News

   सेना हर चुनौती से न‍िपटने के ल‍िए तैयार, सर्जिकल स्ट्राइक भी व‍िकल्‍प: रणबीर सिंह    ||   BJP विधायक मानवेंद्र ने बदला पाला, राज्यवर्धन बोले- कांग्रेस ने 70 साल में मंत्री नहीं बनाया    ||   सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर छिड़ी जंग, हिरासत में 30 प्रदर्शनकारी    ||   विवेक तिवारी हत्याकांडः HC की लखनऊ बेंच ने CBI जांच की मांग ठुकराई    ||   केरलः अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने सबरीमाला फैसले के खिलाफ HC में लगाई याचिका    ||   कोलकाताः HC ने दुर्गा पूजा आयोजकों को ममता के 28 करोड़ देने के फैसले पर रोक लगाई    ||    रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस मिसाइल पर भारत की डील    ||   नार्वेः राजधानी ओस्लो में आज होगा शांति के नोबेल पुरस्कार का ऐलान    ||   अंकित सक्सेना मर्डर केसः ट्रायल के लिए अभियोगपक्ष के 2 वकीलों की नियुक्ति    ||   जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉफ्रेंस के दो कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या, मरने वालों में एक MLA का पीए भी     ||

अच्छी शिक्षा की कमी में पहाड़ो के स्कूल हो रहे खाली, कई स्कूलों में आते हैं मात्र 2-3 छात्र

अंग्वाल संवाददाता
अच्छी शिक्षा की कमी में पहाड़ो के स्कूल हो रहे खाली, कई स्कूलों में आते हैं मात्र 2-3 छात्र

देहरादून। जहां एक तरफ प्रदेश सरकार पहाड़ों से हो रहा पलायन रोकने को लेकर चिंता जाहिर कर रही है, वहीं दूसरी ओर बच्चों की परविश और अच्छी शिक्षा के चलते गांव खाली हो रहे हैं। गांव में बच्चों की मस्ती ओर शोर-शराबा के बजाय अब सनाटा सुनने को मिलता है। कई गांवों में अब न तो कोई बच्चा है और ना ही कोई जवान। रिपोर्ट के मुताबिक, अबतक चमोली जिले के 12 सरकारी स्कूल पर ताले लग गए है। गांव के बच्चे नजदीकी शहरों में इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने जा रहे हैं। स्कूल में बच्चें न होने का कारण प्राथमिक और जूनियर स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में चमोली के 9 विकासखंडों में कुल 972 प्राथमिक और 207 जूनियर स्कूल ही चल रहे हैं।

यह भी पढ़े- विदेश में पढ़ाई करने का सपना अब होगा पूरा, इन जगहों पर फ्री में मिलती है हायर एजुकेशन

 


इतना ही नहीं कई स्कूल ऐसे भी है जहां केवल 2-3 छात्र पढ़ने आते हैं। हर साल लगातार प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की कम होती संख्या के कारण सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर भी सवाल उठ रहा हैं। लोगों का कहना है कि गांव के स्कूलों में नियुक्त टीचर भी गांव में नही रहना चाहते हैं। वह शहरों में कमरे लेकर रह रहे हैं, जिसके कारण वह स्कूल देर से पहुंचते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित होती है। कुछ लोगों का तो कहना है कि सरकार को सरकारी स्कूलों का निजीकरण कर देना चाहिए।

 

यह भी पढ़े-  प्राईवेट स्कूलों को खाली सीटों की जानकारी पब्लिक करने का दिया गया आदेश

Todays Beets: