Tuesday, August 22, 2017

जानिए आपकी जन्मकुंडली में काल सर्प योग दोष होने का मतलब, एक-दो नहीं 288 प्रकार से लगता है दोष  

पंडित विवेक खंकरियाल
जानिए आपकी जन्मकुंडली में काल सर्प योग दोष होने का मतलब, एक-दो नहीं 288 प्रकार से लगता है दोष  

अमूमन आपने सुना होगा कि किसी व्यक्ति पर काल सर्प योग का दोष है। तो क्या आप जानते हैं कि इस बात के मायने क्या हैं। आखिर इस दोष के चलते आपके काम-काम, स्वास्थ, आर्थिक स्थिति और आपके आचार-विचार पर क्या पड़ता है प्रभाव। अगर नहीं....तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्या है यह दोष और इससे कैसे पाएं मुक्ति।

असल में काल सर्प योग दोष, आपकी कुंडली में राहु और केतु के मध्य सारे ग्रहों के आने की स्थित में यह दोष जातक पर आ जाता है। काल का अर्थ मृत्यु होता है, अर्थात...जिस किसी भी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प योग होता है, उसे अनेक प्रकार से कष्टों का सामना करना पड़ता है। कुल मिलाकर 288 प्रकार से काल सर्प योग दोष लगता है। इसके कारण व्यक्ति का भाग्य प्रवाह राहु-केतु से अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में जातक उन्नति नहीं कर पाता। जातक के कार्य क्षेत्र में कई प्रकार की अड़चनें, मसलन, विवाह न होना, विवाह हो जाए तो संतान बाधा, कर्ज का बोझ एवं अनेक प्रकार के दुख भोगने पड़ते हैं। मुख्यतः काल सर्प योग हमारी कुंडली में 12 प्रकार का होता है। आइये बताते हैं इनके प्रकार

 

--वासुकी काल सर्प योग--

आपकी कुंडली के तीतृय भाव (अर्थात पराक्रम भाव) से नवम भाव (अर्थांत धर्म) के बीच यानि राहु-केतु के मध्य अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर वासुकी नामक काल सर्प योग बनता है।

पदम काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के पंचम भाव (अर्थात पुत्र भाव) से नवम भाव (अर्थांत धर्म) के बीच यानि राहु-केतु के मध्य अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर पदम काल सर्प योग बनता है।

कर्कोटक काल सर्प योग---

आपकी कुंडली में जब राहु दूसरे (अर्थात धन भाव) और केतु आठवें  भाव (अर्थांत मृत्यु भाव) के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर कर्कोटक काल सर्प योग बनता है।

कुलिक काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के दूसरे भाव में केतु (अर्थात धन भाव) और आठवें भाव (अर्थांत मृत्यु) में राहु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर पदम काल सर्प योग बनता है।

महापदम काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के छठे भाव में राहु (अर्थात शत्रु भाव) से 12वें भाव केतु (अर्थांत व्यय) के बीच अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर महापदम काल सर्प योग बनता है।


शंखनाद काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के नवम भाव में राहु (अर्थात घर्म भाव) से तीसरे भाव में केतु(अर्थांत भ्रात) के बीच अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर शंखनाद काल सर्प योग बनता है।

तक्षक काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के सप्तम भाव में राहु (अर्थात स्त्री भाव) से प्रथम भाव में केतु(अर्थांत तनु) के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर तक्षक काल सर्प योग बनता है।

अनंत काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के प्रथम भाव में राहु (अर्थात तनु भाव) से सप्तम भाव में केतु (अर्थांत स्त्री) के बीच अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर अनंत काल सर्प योग बनता है।

शंखपाल काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु (अर्थात सुख भाव) से 10वें भाव में केतु (अर्थांत कर्म भाव) के बीच अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर शंखपाल काल सर्प योग बनता है।

पातक काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के दसवें भाव में राहु (अर्थात कर्म भाव) से चतुर्थ भाव में केतु (अर्थांत सुख भाव) के बीच अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर पातक काल सर्प योग बनता है।

शेषनाग काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के 12वें भाव में राहु (अर्थात व्यय भाव) से छठे भाव में केतु (अर्थांत शत्रु भाव) के बीच अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर शेषनाग काल सर्प योग बनता है।

विषाक्त  काल सर्प योग---

आपकी कुंडली के 11वें भाव में राहु (अर्थात आय भाव) से पंचम भाव में केतु (अर्थांत पुत्र भाव) के बीच अगर सभी ग्रह आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक पर विषाक्त काल सर्प योग बनता है।

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