Sunday, December 16, 2018

क्या आप जानते हैं महाभारत में एक नहीं बल्कि दो थे कृष्ण

अंग्वाल न्यूज डेस्क
क्या आप जानते हैं महाभारत में एक नहीं बल्कि दो थे कृष्ण

नई दिल्ली। श्रीकृष्ण के तमाम चमत्कारों के बारे में तो आप सब जानते हैं, पर क्या आप यह जानते है कि महाभारतकाल के दौरान एक नहीं बल्कि दो कृष्ण थे! इतना ही नहीं ये दोनों ही भगवान विष्णु का अवतार माने जाते हैं। महाभारत के वो कृष्ण जिन्होंने पांडवों का साथ दिया था, द्रौपदी की मर्यादा को बचाया, अर्जुन का सारथी बन उन्हें कुरूक्षेत्र के गीता का उपदेश दिया। कृष्ण के इस रूप के बारे में तो हम सभी जानते हैं, पर आज हम आपको महाभारत के दूसरे कृष्ण के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

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कौन थे महाभारत के दूसरे कृष्ण

महाभारत के दूसरे कृष्ण कोई ओर नहीं बल्कि महाभारत के रचयिता महार्षि वेदव्यास थे। उनका मूल नाम श्रीकृष्ण दैव्पायन व्यास था। उनकी माता का नाम सत्यवती व पिता का नाम महार्षि पाराशर था।


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क्यों माना जाता है दूसरा कृष्ण

श्रीमद्भागवत गीता में भगवान विष्णु के जिन 24 अवतारों का वर्णन है, उनमें महर्षि वेदव्यास का भी नाम है। कहा जाता है कि जन्म लेते ही महर्षि वेदव्यास युवा हो गए थे और तपस्या के लिए दैव्यापन द्वीप चले गए। तपस्या करने से वे काले हो गए इसलिए उन्हें कृष्ण दैव्यापन कहा जाने लगा। धर्म ग्रंथों में जो अष्ट चिंरजीवी बताए गए हैं, महार्षि उन्ही में से एक हैं। इसी कारण उन्हें आज भी जीवित माना जाता है। महार्षि ने जब कलयुग का बढ़ता प्रभाव देखा तो उन्होंने ही पाड़वों को स्वर्ग की यात्रा करने को कहा। महार्षि वेदव्यास की कृपा से ही धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म हुआ था। वेदव्यास ने ही संजय को दिव्य द्ष्टि प्रदान की थी, जिससे संजय ने धृतराष्ट्र को पूरे युद्ध का वर्णन महल में ही सुनाया था।

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