Tuesday, August 22, 2017

नाग पंचमी आज : क्यों मनाया जाता है यह त्योहार, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा—अर्चना

अंग्वाल न्यूज डेस्क
नाग पंचमी आज : क्यों मनाया जाता है यह त्योहार, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा—अर्चना

आज नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस पर्व का हिंदू धर्मग्रंथों में अत्यंत महत्व है। वाराह पुराण के अनुसार, आज के ही दिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने अपने प्रसाद से शेषनाग को विभूषित किया था। शिवजी सर्पों की माला पहनते हैं, विष्णु भगवान शेषनाग पर शयन करते हैं इसीलिए इनकी पूजा के लिए प्रति वर्ष श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी पर्व मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, नाग भारत की एक जाति थी जिसका आर्यों से संघर्ष हुआ करता था। आस्तीक ऋषि ने आर्यों और नागों के बीच सद्भाव उत्पन्न करने का बहुत प्रयत्न किया। वे अपने कार्य में सफल भी हुए। दोनों एक-दूसरे के प्रेम सूत्र में बंध गए। यहां तक कि वैवाहिक संबंध भी होने लगे। इस प्रकार अंतर्जातीय संघर्ष समाप्त हो गया। सर्पभय से मुक्ति के लिए आस्तीक का नाम अब भी लिया जाता है।

नाग पूजा हमारे देश में प्राचीन काल से प्रचलित है। समुद्र मंथन के समय वासुकि नाग की रस्सी बनाई गई थी। यही कारण है कि आदि ग्रंथ वेदों में भी नागों को नमस्कार किया गया है। यजुर्वेद में लिखा है :

नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु येन्तरिक्षे। श्ये दिवि तेभ्य: सर्पेभ्यो नम:।

अग्नि पुराण में नागों के 80 कुलों का उल्लेख है। उनमें 9 नाग प्रमुख हैं। इनके नाम के स्मरण का भी निर्देश है

अनंत वासुकि शेष पद्मनाभ च कंबलम। शंखपाल धृतराष्ट्र तक्षक कालिया यथा।एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम। सायंकाले पठेन्नित्य प्रात:काले विशेषम:।

क्यों मनाई जाती है नागपंचमी 


लोगो का मानना है कि सर्प ही धन की रक्षा ​के लिए तत्पर रहते हैं और इन्हें गुप्त,छुपे और गड़े धन की रक्षका करने वाला माना जाता है। आसान शब्दो में कहा जाए तो नाग मां लक्ष्मी की रक्षा करते हैं। जो हमारे धन की रक्षा में हमेशा तत्पर रहते हैं। अतः धन-संपदा व समृद्घि की प्राप्ति के लिए नाग पंचमी का पूजन किया जाता है। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिव के लिंग स्वरुप जी की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है तथा साधक को धनलक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है तथा संचित धन की रक्षा होती है।

शुभ समय पर करें पूजन

नागपंचमी गुरुवार सुबह 7:02 पर कर्क लग्न में आरंभ हो जाएगी। 7:14 पर कर्क लग्न समाप्त हो जाएगा। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र बृहस्पतिवार की रात्रि 4:39 पर समाप्त होगा। दोपहर 1:30 से लेकर 3 बजे तक राहु काल रहेगा। सुबह 7:05 तक भद्रा रहेगी, इस दौरान पूजन न करें। पंचमी तिथि गुरुवार सुबह 7:05 से लेकर 28 जुलाई की सुबह 6:38 तक रहेगी।

 

 

 

 

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