Wednesday, August 23, 2017

आया माता के नौ स्वरुपों के पूजन का समय, जानिए क्या है माता के नौ रूपों से जुड़ी पौराणिक कथाएं

पंडित विवेक खंकरियाल
आया माता के नौ स्वरुपों के पूजन का समय, जानिए क्या है माता के नौ रूपों से जुड़ी पौराणिक कथाएं

सर्व मंगल मांगल्ये सिवे सर्वाथ साधिके ।

शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणी नम्स्तुते । ।

 

पितृपक्ष खत्म होने के साथ ही शनिवार को माता के नवरात्रे शुरू हो रहे हैं। इस दौरान माता के भक्त नौ दिन तक माता के विभिन्न रूपों की पूजा-अराधना करते हुए अपने घर-परिवार-कुटुंब के लिए खुशहाली की कामना करते हैं। पर क्या आप जानते हैं मां के नौ स्वरूप की क्या है पौराणिक कथाएं। क्या आप जानते हैं किस तरह माता की पूजा-अर्चना के लिए तैयारी करनी चाहिए। अगर नहीं तो आइये हम आपको बताते हैं-

 

नवरात्र के पहले दिन मां के जिस स्वरूप का पूजन किया जाता है उसे हमें शैलपुत्री के रूप से जानते हैं। इस बार नवरात्र नौ की जगह 10 दिन के हैं। इसके चलते आपको मां शैलपुत्री की पूजा दो दिन करनी होगी। बहरहाल बता दें कि पर्वत राज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण मां दुर्गा के इस रूप का नाम शैलपुत्री पड़ा। शास्त्रों के कथनानुसार मां शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप है। मां के दाहिने हाथ में भगवान शिव के द्वारा दिया गया त्रिशूल और भगवान विष्णु द्वारा प्रदत कमल का फूल अति शोभायमान है। मां शैलपुत्री बैल पर सवारी करती हैं और समस्त जीवों की रक्षा करती हैं। पौराणिक कथानुसार मां शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में प्रजापति की पुत्री सती थीं, जिनका पाणिग्रहण संस्कार भगवान शिव के साथ हुआ था।

 

--पूजन का विधान--

1- मां का पूजन करने से पहले अपने देवस्थान को साफ कर लें। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें और अपने हिसाब से सजा लें।

 

2- इसके बाद सर्वप्रथम गणेश पंचांग चौकी तैयार करें, जिसमें गौरी-गणेश, ओमकार (ब्रहमा-विष्णु-महेश) स्वास्तिक, सप्त घृतमात्रिका, योगनी, षोडस मात्रिका, वास्तु पुरुष, नवग्रह देवताओं समेत वरुण देवता को तैयार करें।


 

3- तदोपरांत सर्वतो भद्र मंडल (चावल से बनाया गया आसन, जिसपर आह्वान करके हमारे सभी देवी-देवताओं को विराजमान किया जाता है। ) को तैयार करें।

 

4- इसके बाद एक सकोरे में मिट्टी भरकर उसमें जौ को बोएं और देव स्थान पर रख दें।

 

5- इसके बाद माता के मंदिर को चुनरी और फूल मालाओं से सजाएं। माता की मूर्ति पर रोली का टिका लगाएं। चावल लगाएं। साथ ही देवस्थान पर अपनी श्रद्धानुसार फल-फूल-मिष्ठान तांबुल दक्षिणा इत्यादि समर्पित करें।

 

5- इसके बाद अपने अनुसार या ब्राह्मणों के द्वारा पाठ करें/कराएं।

 

 

कल पढ़ें मां के दूसरे स्वरूप के बारे में.....

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