Saturday, November 25, 2017

जानिए क्या है पंचामृत, पूजा-अर्चना में क्या होता है इसका महत्व

अंग्वाल संवाददाता
जानिए क्या है पंचामृत, पूजा-अर्चना में क्या होता है इसका महत्व

आपने भगवान की पूजा- अर्चना से पहले देवमूर्ति का स्नान पंचामृत से होते हुए देखा होगा। इसका पूजा में विशेष महत्व माना जाता है ।पंचामृत का अर्थ है पांच तरह के अमृत का मिश्रण । इसी पंचामृत को भगवान के प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। श्रद्धालु इस प्रसाद को पाकर खुद को धन्य मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान को चढ़ने वाले इस पंचामृत के पीछे एक गहरा संदेश छुपा होता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पंचामृत दूध, दही, शहद , घी व शक्कर मिलाकर बनाया जाता है, लेकिन पंचामृत में मिलने वाले इन सभी तत्वों का अलग महत्व होता है।

दूध

दूध को मोह का प्रतीक माना जाता है। बताया जाता है कि गाय जब तक दूध नहीं देती जब तक उसके पास उसका बछड़ा नहीं होता।

शहद

मधुमक्खी फूलों के कण-कण से रस चूसकर शहद बनाती है। इसलिए इसे लोभ का प्रतीक माना जाता है।

दही


वहीं दही की तासीर गर्म होने के कारण इसे क्रोध का प्रतीक माना गया है।

घी

घी समृद्धि के साथ आने वाला तत्व है तो इसे अंहकार का प्रतीक माना गया है।

शक्कर

शक्कर से सुंदर पति-पत्नी, विवाह में आ रही रुकावट का दूर होना, प्रखर मस्तिष्क, दिल को छू लेने वाली आवाज और खोई हुई पद-प्रतिष्ठा मिलती है। 

पूजा-अर्चना  में पंचामृत के उपयोग का अर्थ हुआ , हम मोह, लोभ, क्रोध और अंहकार को शक्कर में मिलाकर भगवान को अर्पित करके उनके चरणों में शरणागत हो जाते हैं।

साथ ही भारतीय सभ्यता के अनुसार बताया गया है कि श्रद्धापूर्वक पंचामृत का पान करने वाले व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार की सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ मनुष्य को  उसके शरीर से मुत्यु के पश्चात् जन्म-मरण के चक्र से मुक्त मिल जाती है।

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