Monday, October 23, 2017

रविवार को सूर्य भगवान के पूजन से होगी हर मनोकामना पूरी, जानिए व्रत-पूजन का विधि- विधान

अंग्वाल न्यूज डेस्क
रविवार को सूर्य भगवान के पूजन से होगी हर मनोकामना पूरी, जानिए व्रत-पूजन का विधि- विधान

नई दिल्ली। यूं तो अपनी मनोकामना के लिए आदमी हर दिन ही पूजा अर्चना करता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि रविवार को इन मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अराधना करने की दृष्टि से काफी शुभ माना जाता है। भले ही रविवार को लोग आराम का दिन मानते हों लेकिन शास्त्रों के मुताबिक रविवार को सूर्य भगवान का दिन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव जल्द ही मनोकामना पूर्ति के देव भी हैं। सूर्य  देव बुद्धि के देवता कहे जाते हैं। आपने अपने माता पिता को अक्सर कहते सुना भी होगा कि रोज सुबह उठकर स्नान के बाद सूर्य को चल चढ़ाएं।  मान्यताओं के अनुसार सूर्योदय और सूर्योस्त के समय सूर्य को नमस्कार करना भी शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सूर्य देव हमें समाज में सम्मान प्रतिष्ठा दिलाते है। 

 

ज्योतिषीय के अनुसार सूर्य देव ही किसी व्यक्ति की जिंदगी में उसके शिक्षा ग्रहण की अवधि को निश्चित करते हैं। इतना ही नहीं सूर्य देव जल्द मनोकामना पूर्ति के देव भी हैं। अगर आप भी काफी दिन से अपने इच्छाओं के पूरे होने का इंतजार कर रहें हैं तो आइए हम आपको बताएंगे की  कैसे रविवार के दिन मनोकामना पूर्ति के लिए अराधना करें। 

असल में रविवार के दिन सूर्य देव की आराधना की जाती है। अगर आपकी कोई मनोकामना है तो उसकी इच्छापूर्ति के लिए आपक रविवार के दिन व्रत कर सकते हैं, क्योंकि इस व्रत को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस व्रत को रखने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है, लेकिन इस व्रत से जुड़े कुछ नियमों का पालन आवश्यक है। 

 

 

प्रात उठकर स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में जलकर लेकर उसमें फूल, चावल डालें और फिर यूर्य मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। आपको बता दे कि आपको स्नान सूर्योदय से पहले करना होगा। स्नान करने के बाद सूर्यदेव को तीन बार अर्ध्य देकर प्रणाम करें। संध्या के समय आपको एक बार फिर सूर्य देव को अर्ध्य देकर प्रणाम करना होगा। वहीं अर्ध्य देते समय सूर्य देव के मंत्रों का जाप करना अतिआवश्यक है। 

रविवार के दिन व्रत के दौरान इस बात का खास ध्यान रखें कि तेल, नमक आदि का सेवन इस व्रत में वर्जित है और व्रत में केवल एक ही समय भोजन करें। भोजन के पूर्व स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध वस्त्र धारण कर निम्न मंत्र बोलते हुए पुनः अघ्र्य दें-

नमः सहस्रांशु सर्वव्याधि- विनाशन/गृह- णाघ्र्यमय- दत्तं संज्ञा सहितो रवि।।

इस व्रत में इलायची मिश्रित गुड़ का हलवा, गेहूं की रोटियां या गुड़ से निर्मित दलिया सूर्यास्त के पूर्व भोजन के रूप में ग्रहण करना चाहिए। यदि निराहार रहते हुए सूर्य छिप जाये तो दुसरे दिन सूर्य उदय हो जाने पर अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करें ।  भोजन के पूर्व हलवा या दलिया का कुछ भाग देवस्थान या देव-दर्शन को आए बालक-बालिकओं को देना चाहिए।ऐसा करने से सूर्य भगवान जल्द ही आपकी मनोकामना पूरी करेंगे। हालांकि ध्यान रहें रविवार के व्रत के दौरान नियमों का सख्ती से पालन करें। व्रत के दौरान की गई चूक आपको आपकी मनोकामना से दूर कर सकती है।


रविवार की आरती

कहुँ लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकि जोति विराजे ।। 

सात समुद्र जाके चरण बसे, कहा भयो जल कुम्भ भरे हो राम ।

कोटि भानु जाके नख की शोभा, कहा भयो मन्दिर दीप धरे हो राम ।

भार उठारह रोमावलि जाके, कहा भयो शिर पुष्प धरे हो राम ।

छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे, कहा भयो नैवेघ धरे हो राम ।

अमित कोटि जाके बाजा बाजे, कहा भयो झनकार करे हो राम ।

चार वेद जाके मुख की शोभा, कहा भयो ब्रहम वेद पढ़े हो राम ।

शिव सनकादिक आदि ब्रहमादिक, नारद मुनि जाको ध्यान धरें हो राम ।

हिम मंदार जाको पवन झकेरिं, कहा भयो शिर चँवर ढुरे हो राम ।

लख चौरासी बन्दे छुड़ाये, केवल हरियश नामदेव गाये ।। हो रामा ।

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