Tuesday, January 23, 2018

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नए शामिल हुए नेताओं को मुंहमांगी टिकट देकर कहीं खुद ही परिवारवाद के पचड़े में न फंस जाए बीजेपी!

अंग्वाल न्यूज डेस्क
नए शामिल हुए नेताओं को मुंहमांगी टिकट देकर कहीं खुद ही परिवारवाद के पचड़े में न फंस जाए बीजेपी!

देहरादून।राज्य में होने वाले चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नेता अपना राजनीतिक मकसद साधने के लिए अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थामने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड के लिए अपने 64 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। उसमें हाल ही में पार्टी में शामिल हुए यशपाल आर्य और उनके बेटे दोनों को ही टिकट दिया गया है। ऐसे में बीजेपी पर भी परिवारवाद में घिरने की संभावना जताई जा रही है।

कांग्रेस को मिला मुद्दा

गौरतलब है कि वर्षों तक कांग्रेस की सेवा करने वाले यशपाल आर्य बीजेपी में शामिल हो गए हैं। पार्टी छोड़ने की वजह यशपाल आर्य के द्वारा अपने बेटे संजीव के लिए टिकट का न मिलना बताया जा रहा है। बीजेपी में शामिल होते ही दोनों को टिकट मिल गया। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेताओं से अपने परिवार के लोगों के लिए टिकट न मांगने की अपील कर चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति करने को लेकर भाजपा ने बड़ा प्रहार किया था। ऐसे में यशपाल आर्य और उनके बेटे दोनों को टिकट मिलने से कांग्रेस पार्टी को भी भाजपा को घेरने का एक मुद्दा मिल गया है। 

कांग्रेस में भारी असंतोष


यशपाल आर्य की जिद को देखते हुए पार्टी के दूसरे नेता भी अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट की मांग करने लगे थे। ऐसे में उत्तराखंड के बाजपुर और नैनीताल सीट को लेकर सबसे अधिक दवाब कांग्रेस पर था। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत को यह कहना पड़ा था कि अगर मंत्री पुत्र काबिल है और सीट जीतने की ताकत रखता है तो उसे टिकट दिया जाएगा। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी के अंदर टिकट को लेकर नेताओं में संतोष नहीं है। 

पुत्रमोह में छोड़ी अपनी सीट

आपको बता दें कि यशपाल आर्य वर्ष 2012 में प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए ही अपने पुत्र संजीव को आरक्षित सीट नैनीताल से मैदान में उतारने की पूरी तैयारी कर ली थी। यशपाल आर्य के पुत्रमोह का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बेटे की सीट सुरक्षित करने के लिए यशपाल नैनीताल से खुद चुनाव लड़ने की बजाय बाजपुर चले गये थे। इस पर काफी हंगामा हुआ था। आर्य पर दूसरे उम्मीदवार का नाम पैनल में न भेजने का आरोप भी लगा था। इसके बाद पार्टी ने एक परिवार एक टिकट का फाॅर्मूला लागू किया था। इसी से नाराज यशपाल आर्य इस बार किसी भी कीमत पर अपने बेटे को चुनाव लड़ाना चाहते थे। बीजेपी की तरफ से उन्हें टिकट तो मिल गया है। अब देखना ये होगा कि क्या उनका बेटा अपनी सीट जीतकर पार्टी को तोहफा दे सकता है! 

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