Saturday, January 20, 2018

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गठबंधन की बिसात :- यूपी चुनावों के लिए सपा ने कांग्रेस को दिया 88 सीटों का प्रस्ताव, क्या बनेगी बात ?

अंग्वाल संवाददाता
गठबंधन की बिसात :- यूपी चुनावों के लिए सपा ने कांग्रेस को दिया 88 सीटों का प्रस्ताव, क्या बनेगी बात ?

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। यूपी में साल 2017 किस सियासी पार्टी के लिए नया सवेरा लेकर आएगा, यह वक्त के साथ सभी को पता चल जाएगा। फिलहाल, राज्य में सियासी समीकरण को ध्यान में रखते हुए गठबंधन की गांठ मजबूत करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तो लंबे वक्त से चली आ रही है, बात तो दोनों पार्टियों के बीच सीटों की तालमेल पर अटकी हुई है। सपा के साथ बातचीत में कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।

सपा ने दिया 100 से कम सीटों का ऑफर

यूपी विधानसभा की कुल 403 में से 300 सीटों पर चुनाव लड़ने को अड़ी सपा अब खुद 297 सीटें और सहयोगियों को 106 सीटें देने को राजी है। सपा ने कांग्रेस को 88 सीटों का ऑफर दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि आरएलडी और जेडीयू को 18 सीटों पर एडजस्ट करना होगा।

अमेठी को लेकर फंसा पेंच

कांग्रेस और सपा के बीच अब भी अमेठी की सीट को लेकर पेच फंसा हुआ है। दरअसल, गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र से कांग्रेस नेता संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह विधायक रही हैं, लेकिन इस वक्त वहां के विधायक सुर्खियों में रहने वाले यूपी के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति हैं, जो मुलायम के खासे करीबी बताए जाते हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी अमेठी की सीट खुद के लिए मांग रही है, जबकि कांग्रेस अमेठी और रायबरेली की सभी 10 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है।


देरी के पीछे भी है कांग्रेस का दांव 

वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि हारी हुई सीट ही सही, लेकिन समाजवादी पार्टी कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा सौ तक पहुंचा दे, तो बेहतर होगा और कांग्रेस का सम्मान भी बना रहेगा. इसी माथापच्ची के बीच लगातार दोनों दलों में बातचीत आगे बढ़ रही है. वैसे सूत्रों की मानें तो कांग्रेस का एक तबका इस देरी के पीछे एक और कवायद को वजह मान रहा है. उनके मुताबिक, यूपी में गठबंधन के लिए पार्टी की पहली पसंद बसपा है. ऐसे में सपा से तालमेल में इस देरी के पीछे की रणनीति यह है कि मायावती को शायद यह अंदाजा हो जाए कि वह अकेले सरकार नहीं बना पा रही, तो कांग्रेस से समझौता कर लें।

कांग्रेस का सियासी गठबंधन

कांग्रेस अब समाजवादी पार्टी, आरएलडी और जेडीयू के साथ मिलकर यूपी में भाजपा और बसपा से टकराने की तैयारी में है। सूत्रों की मानें तो यूपी में चुनाव की घोषणा होने के बाद गठबंधन की घोषणा भी कर दी जाएगी। फिलहाल दोनों पार्टियों के राजनेताओं के बीच बातचीत जारी है। खैर देखने वाली बात यह होगी कि क्या कांग्रेस को सपा का 88 सीटों वाला ऑफर पसंद आएगा, क्या गांधी परिवार के गढ़ अमेठी की सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को उतरने के लिए राजी होगी। सवाल कई हैं जिनके जवाव आने वाले वक्त में जरूर मिल जाएगा।      

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