Tuesday, September 19, 2017

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कांग्रेस ने मुझे पार्टी से निकाल दिया, मुझे भगवान शंकर ने विष पीना सिखाया है, मैं राजनीतिक जीवन से सन्यास लेता हूं - शंकर सिंह वाघेला

अंग्वाल न्यूज डेस्क
कांग्रेस ने मुझे पार्टी से निकाल दिया, मुझे भगवान शंकर ने विष पीना सिखाया है, मैं राजनीतिक जीवन से सन्यास लेता हूं - शंकर सिंह वाघेला

गांधी नगर । गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और पीएम मोदी के राजनीतिक गुरु कहने जाने वाले राज्य के दिग्गज नेता शंकर सिंह वाघेला ने शुक्रवार को कहा कि मैं अभी कांग्रेस में हूं लेकिन पार्टी ने मुझे 24  घंटे पहले ही पार्टी से निकाल दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे कभी सत्ता की लालसा नहीं रही, भगवान शंकर ने काफी कुछ सिखाया है, मुझे उन्होंने विष पीना सिखाया है। फिर भी मैं खड़ा हूं, 77 नॉट आउट । बापू कभी रिटायर नहीं होगा। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर संघ से अपने पुराने रिश्तों का हवाला देते हुए कहा कि संघ ने मुझे दूसरों की सेवा करना सिखाया है। कांग्रेस पर हमला किया। उन्होंने कहा कि विनाश काले-विपरित बुद्धि। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह अभी भी पार्टी में हैं लेकिन ये मेरे जीवन का निर्णायक क्षण हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन से सन्यास की घोषणा कर दी।

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चुनाव के लिए कांग्रेस का होमवर्क खराब

अपने जन्मदिन के दिन आयोजित एक समारोह में समर्थकों को संबोधित करते हुए वाघेला ने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लेकिन इसके लिए कांग्रेस ने जो होमवर्क किया है वह काफी खराब है। इस दौरान उन्होंने पार्टी आलाकमान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विनाश काले -विपरीत बुद्धि। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर पार्टी की तैयारियों को बेहद खराब बताया। पार्टी आलाकमान को कहा कि हमें आपकी नहीं आपको हमारी जरूरत है। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि हम जैसे हैं वैसे ही दिखते हैं। हम एमपी और एमएलए बनाने वाले हैं। हम पावर को छोड़ने वाले हैं।

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40 साल के राजनीति करियर में काफी उतार-चढ़ाव


बता दें कि संघ के कार्यकर्ता के रूप में कई साल काम करने के बाद वर्ष 77 में वह पहली बार भाजपा से सांसद बने। इसके बाद वह गुजरात भाजपा के अध्यक्ष भी बने। लगातार राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे वाघेला ने 95 में पार्टी की बड़ी जीत के बाद खुद के सीएम बनने के सपने देखे थे लेकिन पार्टी ने उनकी जगह केशूभाई पटेल को सीएम पद पर बैठा दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने पार्टी से अपने संबंध तोड़ दिए और अपने कुछ नेताओं के साथ एक नई पार्टी का गठन किया। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। 

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कांग्रेस ने नहीं मानी थी मांगें

बता दें कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वाघेला ने कांग्रेस आलाकमान से कुछ मांग की थी, जिसमें प्रचार की कमान और मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने की बात थी। इस मांग को कांग्रेस ने ठुकरा दिया, जिसके चलते वाघेला कांग्रेस से नाराज चल रहे थे। हालांकि पिछले दिनों वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी मिले थे लेकिन उनकी मांग पर मुहर नहीं लग पाई थी। बताया जा रहा है कि वाघेला को सीएम का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर कांग्रेस को अंदेशा था कि इससे प्रदेश कांग्रेस प्रमुख भरत सिंह सोलंकी के अलावा शक्तिसिंह गोहिल और अर्जुन मोढवाडिया जैसे नेता नाराज हो जाते जो वाघेला की मांग को लेकर उनके खिलाफ हैं।

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