Tuesday, March 26, 2019

Breaking News

    दिल्लीः NGT ने जर्मन कार कंपनी वोक्सवैगन पर 500 करोड़ का जुर्माना ठोंका     ||    दिल्लीः राहुल गांधी 11 मार्च को बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे     ||    हैदराबाद: टीका लगाने के बाद एक बच्चे की मौत, 16 बीमार पड़े     ||   मध्य प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर होंगे सलमान खान, CM कमलनाथ ने दी जानकारी     ||   पाकिस्तान को FATF से मिली राहत, ग्रे लिस्ट में रहेगा बरकरार     ||   आय से अधिक संपत्ति केसः हिमाचल के पूर्व CM वीरभद्र सिंह के खिलाफ आरोप तय     ||   भीमा-कोरेगांव केसः बॉम्बे HC ने आनंद तेलतुंबड़े की याचिका पर सुनवाई 27 तक टाली     ||   हिमाचल प्रदेश: किन्नौर जिले में आया भूकंप, तीव्रता 3.5     ||   PAK सेना के ISPR के डीजी ने कहा- हम युद्ध की तैयारी नहीं कर रहे, भारत धमकी दे रहा है     ||   ICC को खत लिखेगी BCCI- आतंक समर्थक देश के साथ खत्म हो क्रिकेट संबंध     ||

जख्मों पर लगे बैंडेज को हटाने की नहीं पड़ेगी जरूरत, घाव के सूखने के साथ ही घुलेगा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
जख्मों पर लगे बैंडेज को हटाने की नहीं पड़ेगी जरूरत, घाव के सूखने के साथ ही घुलेगा

नई दिल्ली। किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर शरीर के किसी हिस्से में जख्म लगने पर लोग अक्सर पट्टी या बैंडेज लगाने से डरते हैं क्योंकि उसे हटाते हुए काफी दर्द का अनुभव होता है। अब आईआईटी और बीएचयू के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने डीआरडीओ के सहयोग से एक ऐसी पट्टी यानी बाइलेयर मेंबरिंग तैयार की, जो घाव को ठीक कर देगी और खाल में ही घुल भी जाएगी। ये जख्मी जवानों के घाव को भरने में काफी सहायक होगी। 

गौरतलब है कि इस पट्टी की खास बात यह है कि इसको एक बार चिपकाने के बाद हटाने की परेशानी नहीं रहेगी। इसके लिए डीआरडीओ, भारत सरकार के सहयोग से विभाग के प्रोफेसर प्रदीप श्रीवास्तव के निर्देशन में शोध छात्र दिवाकर सिंह ने 4 वर्षों तक काम किया। यहां बता दें कि यह प्रयोग खासतौर पर डीआरडीओ के लिए किया जा रहा है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि यह पट्टी आम लोगों के लिए भी सुलभ हो पाएगा। 


ये भी पढ़ें - साथ में सोने वाले के खर्राटे से उड़ गई है नींद, अपनाएं ये उपाय और पाएं निजात 

बता दें कि यह पट्टी दो लेयरों में होगी, एक परत जख्मी त्वचा को मुलायम बनाएगी जबकि दूसरी परत जख्म को बैक्टीरियल संक्रमण से बचाएगा। साथ ही इस पट्टी में त्वचा के नए सेल बनाने की भी क्षमता है। चिपकाने के बाद जिस गति से सेल बनेंगे उसी तरह धीरे-धीरे पट्टी घुलती जाएगी। चूंकि यह पट्टी डीआरडीओ के लिए तैयार किया गया है ऐसे मंे इसका इस्तेमाल सैनिकों के लिए ज्यादा किया जाएगा। यह पट्टी पूरी तरह जैविक एवं हर्बल है। इसमें नीम, बरगद, एलोवेरा के आदि के तत्व हैं। डीआरडीओ ने इस पट्टी का सफल प्रयोग जानवरों पर किया है अब इंसानों पर इसका प्रयोग करने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है।  

Todays Beets: