Monday, November 20, 2017

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इयरफोन से गाने सुनना लगता है अच्छा तो बहरे होने के लिए रहें तैयार, पढ़े पूरी रिपोर्ट

अंग्वाल संवाददाता
इयरफोन से गाने सुनना लगता है अच्छा तो बहरे होने के लिए रहें तैयार, पढ़े पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली। अगर आपको भी कानों में इयरफोन लगाकर तेज गाने सुनने की आदत है तो हम आपके लिए ऐसी खबर लाएं कि इसके बाद कान में इयरफोन लगाकर गाना सूनने से पहले आप दो बार सोचेंगे। दरअसल, इयरफोन लगाकर तेज गाने सुनने से आपके कानों की सुनने की क्षमता कम हो जाती है। यह आपको बहरा भी बना सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इयरफोन को लगातार यूज करने से यह हमारे कानों की सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसिबेल तक कम हो जाती है। इसलिए इयरफोन लगाकर तेज गाने नहीं सुनने चाहिए। इससे आपके कान के पर्दे में कंपन होता है, जिसके कारण धीरे-धीरे आपको दूर की आवाजें सुनाई देना बंद हो जाती है। इससे मनुष्य में बहरापन की समस्या भी प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेज आवाज में गाने सुनने से कान के अंदर स्ट्रक्चर डैमेज हो जाता है, जिससे ब्रेन को सही सिग्नल मिलना धीरे-धीरे कम होने लगता है। लंबे समय तक तेज आवाज में गाने सुनने की आदत से कान के अंदर की कवरिंग भी डैमेज हो जाती है। 

 

 

60:60 का फॉर्मूला करें इस्तेमाल

डॉक्टर का कहना है कि इससे बचने के लिए 60:60 फॉर्मूला यूज करना चाहिए। युवाओं को इस फॉर्मूला को यूज करने की आदत डाल लेनी चाहिए। म्यूजिक सुनते समय साउंड लेवल को 60 पर्सेंट से ज्यादा नहीं रखना चाहिए और पूरे रात-दिन में 60 मिनट से ज्यादा इयरफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कोशिश करें साउंड को 60 फीसदी से कम ही रखें।

 

 

युवाओं में बढ़ती कम सुनने की बीमारी

रिपोर्ट के मुताबिक, 20-35 वर्ष के युवाओं में इयरफोन के इस्तेमाल की आदत लगातार बढ़ रही है। इसके प्रभाव के कारण एक कान से सुनना कम हो जाता है। इस बीमारी की शुरूआत में लोग इसे पहचान नहीं पाते हैं। ऐसे में दूसरे कान के प्रभावित होने पर कानों में सीटी की आवाज सुनाई देने लगती है।

 

रात को सोते समय इयरफोन लगाना है खतरनाक

इतना ही नहीं डॉक्टर ने बताया कि जो लोग अक्सर रात को इयरफोन लगाकर सो जाते हैं, उनकी लिए यह स्थिति काफी खतरनाक होती है।लंबे समय तक इससे कानो में परेशानी होती रहती है। इसके अलावा सड़क किनारे चलने पर तेज साउंड में गाने सुनने से लोगों को गाड़ी की आवाज सुनाई नहीं देती है। इसके चलते लोग दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। 100 डेसिबल के बाद बाहर की आवाज कान के अंदर नहीं पहुंच पाती है। बता दें 85 डेसिबेल से ज्यादा की आवाज कानों के लिए नुकसानदायक होती है।


 

 

किस में चीज कितनी डेसिबेल साउंड होती है

घर की आवाज – 40 डेसिबेल

नॉर्मल बातचीत, बैकग्राउंड म्यूजिक – 60 डेसिबेल

ऑफिस – 70 डेसिबेल

वैक्यूम क्लीनर - 75 डेसिबेल

चिल्लाना – 90 से 95 डेसिबेल

हैवी ट्रैफिक – 80 से 90 डेसिबेल

ट्रक का हॉर्न – 90 डेसिबेल

डिस्को – 100 डेसिबेल

स्टीरियो हेडफोन – 105 डेसिबेल

मोटरसाइकिल – 95 -100 डेसिबेल

कार रेस – 130 डेसिबेल        

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