Wednesday, September 26, 2018

Breaking News

   ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पूर्व जीएम के ठिकानों पर आयकर के छापे     ||   बिहार: पूर्व मंत्री मदन मोहन झा बनाए गए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष। सांसद अखिलेश सिंह बनाए गए अभियान समिति के अध्यक्ष। कौकब कादिरी समेत चार बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष।     ||   कर्नाटक के मंत्री शिवकुमार के खिलाफ ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया    ||   सीतापुर में श्रद्धालुओें से भरी बस खाई में पलटी 26 घायल, 5 की हालत गंभीर     ||   मंगल ग्रह पर आशियाना बनाएगा इंसान, वैज्ञानिकों को मिली पानी की सबसे बड़ी झील     ||   भाजपा नेता का अटपटा ज्ञान, 'मृत्युशैया पर हुमायूं ने बाबर से कहा था, गायों का सम्मान करो'     ||   आज से एक हुए IDEA-वोडाफोन! अब बनेगी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी     ||   गोवा में बड़ी संख्‍या में लोग बीफ खाते हैं, आप उन्‍हें नहीं रोक सकते: बीजेपी विधायक     ||   चीन फिर चल रहा 'चाल', डोकलाम में चुपचाप फिर शुरू कीं गतिविधियां : अमेरिकी अधिकारी     ||   नीरव मोदी, चोकसी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 25-26 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश     ||

बचपन  में तनाव झेलने वाले बच्चें बनते हैं , जल्दी मैच्योर

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बचपन  में तनाव झेलने वाले बच्चें बनते हैं , जल्दी मैच्योर

नई दिल्ली । अकसर आप ने देखा होगा कि परेशानी और तनाव में लोगों का व्यवहार चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही परेशानी और तनाव बच्चे को जल्दी मैच्योर बनाता है। राडबौड विश्वविद्यालय में बच्चों पर हुए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है ।

यें भी पढ़ें-आपको आ रहा है गुस्सा ! कहीं आप भूखे तो नहीं , पढ़ें पूरी खबर 

शोधकर्ताओं ने अपने शोध में दो तरह के तनाव का अध्ययन किया । शोध में  इस बात का भी पता चला कि तनाव दो तरह के होते हैं। पहला तनाव वह है जो जीवन में घटित घटनाओं के कारण होता है और दूसरा वह होता है जो समाज में हो रही घटनाओं के कारण उत्पन्न होता है ।


यें भी पढ़ें-सेब के सिरके से दूर करें मधुमेह, जानें मोटापा और त्वचा संबंधी रोगों में कैसे मिलेगा फायदा

बता दें कि शोधकर्ताओं ने 5 वर्ष के बच्चों से लेकर 17 वर्ष के किशोरों के वर्ग पर किया जिसमें पाया गया है कि तनाव का सीधा प्रभाव दिमाग के उस भाग  पर पड़ता है जो दिमाग को मैच्योर करने से सीधा जुड़ा होता है। दिमाग का ये भाग समाजिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया को व्यक्त करने में काम आता हैं। इसी के साथ शोध में इस बात को भी पता चला हैं कि तनाव न होने से बच्चे में परिपक्वता की क्रिया भी धीमी होती है और ज्यादा तनाव में कई बार असामाजिक तत्व के लक्षण भी दिखने लगते है।   

Todays Beets: