Saturday, October 20, 2018

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टल गया राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष बनना, अब गुजरात-हिमाचल विधानसभा के नतीजे तय करेंगे राजनीतिक करियर

दीपक गौड़
टल गया राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष बनना, अब गुजरात-हिमाचल विधानसभा के नतीजे तय करेंगे राजनीतिक करियर

नई दिल्ली । कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनने की कवायद फिलहाल टाल दी गई है। सूत्रों की मानें तो अब हिमाचल और कांग्रेस विधानसभा चुनावों के कांग्रेस के लिए अगर नतीजों बेहतर आए तो इस कवायद को फिर से तेज किया जाएगा और अगर नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए तो राहुल गांधी का पार्टी अध्यक्ष बनना एक 'सपना' बन सकता है। कहा जा रहा है कि पार्टी के भीतर जहां एक तबका राहुल गांधी को पार्टी की कमान दिए जाने के पक्ष में है, वहीं कुछ वरिष्ठ नेताओं का एक गुट राहुल की राजनीतिक क्षमताओं को अभी पार्टी अध्यक्ष बनने लायक नहीं समझता। बताया जा रहा है कि ऐसे में हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनावों के नजीते उनके राजनीतिक सफर को तय करेंगे। 

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राज्य इकाइयों को दिए थे निर्देश

बता दें कि दशहरे के करीब पार्टी की ओर से पार्टी अध्यक्ष पद के लिए अपनी आम सहमति बनाने के निर्देश राज्य इकाइयों को दिए गए थे। इसके बाद काफी तेजी से कई राज्यों ने राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए अपनी आम सहमति जताई, लेकिन दीपावली के बाद उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने की बातें हवाई हो गई। लेकिन अब पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं ने संकेत दिए थे कि सोनिया गांधी की जगह राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने में अब थोड़ी देर हो सकती है। 

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बदलाव की प्रक्रिया से चुनाव होगा प्रभावित


सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर राहुल गांधी को लेकर विरोधी स्वर भी हैं। कुछ वरिष्ठ नेता अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं तो कुछ अभी दबी जुबान में ही इन बातों को कह रहे हैं, लेकिन इस विरोध के बीच पिछले दिनों कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने कहा कि बदलाव की प्रक्रिया अब गुजरात चुनावों के बाद ही होगी। पहले कांग्रेस नेताओं की तरफ से बार-बार ऐसे संकेत दिए जा रहे थे कि राहुल गांधी को दीपावली के बाद औपचारिक तौर पर पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। 

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अब जीत ही पार्टी अध्यक्ष पद तक ले जाएगी

पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगर हिमाचल और गुजरात चुनावों में कांग्रेस को बेहतर परिणाम नहीं मिले तो पार्टी के भीतर उनके खिलाफ उठ रहे स्वर और मुखर हो सकते हैं। पार्टी आलाकमान इन बातों को समझ रहा है। इसलिए उन्हें चुनावों के बाद अध्यक्ष पद पर बैठाने की बात कर रहा है, ताकि हार का ठिकरा उनके पार्टी अध्यक्ष बनने पर न आए। वहीं भाजपा नेताओं द्वारा आए दिन राहुल गांधी की राजनीतिक क्षमता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अगर ऐसे में पार्टी गुजरात-हिमाचल चुनाव हार जाती है तो कांग्रेस के पास 2019 के लोकसभा चुनाव में लड़ने के लिए कुछ नहीं रह जाएगा। ऐसे में अब राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष पद तक सिर्फ और सिर्फ गुजरात-हिमाचल प्रदेश में जीत ही ले जा सकती है।

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