Sunday, September 23, 2018

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बस 16 दिन शेष, फिर प्रतिदिन UAE के 40 हजार बैरल तेल पर होगा भारत का हक, मोदी सरकार ने खरीदी तेल क्षेत्र की हिस्सेदारी

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बस 16 दिन शेष, फिर प्रतिदिन UAE के 40 हजार बैरल तेल पर होगा भारत का हक, मोदी सरकार ने खरीदी तेल क्षेत्र की हिस्सेदारी

 नई दिल्ली । भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों को लेकर जहां आम जनता हलकान है। वहीं पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा में एक ऐतिहासिक करार कर देश की पेट्रोलियम क्षेत्र संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए रणनीति की नींव रखी है। असल में पीएम मोदी की हालिया UAE यात्रा के दौरान भारत ने वहां के लोअर जकूम तेल क्षेत्र में 60 करोड़ डॉलर की कीमत पर 10 फीसदी हिस्सेदारी की है। यह समझौता 40 साल के लिए हुआ है, जो 9 मार्च 2018 यानी 16 दिन बाद से लागू हो जाएगा। इसके बाद इस क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले 4 लाख बैरल तेल का 10 फीसदी यानी 40 हजार बैरल तेल (प्रतिदिन) पर भारत का हक होगा। संभावना है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र से 4.5 लाख बैरल तेल निकाला जाएगा। यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात ने पहली बार अपने तेल क्षेत्र में किसी देश को हिस्सा दिया है। मोदी सरकार के इस फैसले ने आने वाले समय में इस तरह अन्य तेल क्षेत्र में भी हिस्सेदारी खरीदने के विकल्पों को खुला कर दिया है। 

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बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल उत्पादक कंपनी ओएनजीसी (विदेश), भारत पेट्रो रिसोर्सेज, इंडियन ऑयल की कंसोर्टियम और अबू धावी के नेशनल ऑयल कंपनी (एडएनओसी) के बीच पिछले दिनों ऑफशोर लोअर जाकुी कंसेशन में 10 फीसदी भागीदारी को लेकर समझौता हुआ। इस समझौते से भविष्य में भारत को काफी फायदा होगा। हालांकि इस समय भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रहीं हैं, जिन्हें लेकर हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत लाकर जनता को राहत देने की बातें हुई। हालांकि वित्तमंत्री ने हाल के दिनों में इसे खारिज करते हुए आने वाले समय में इस पर चर्चा करने का आश्वासन दिया। 

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इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार और विषय विशेषज्ञ अरविंद शरण का कहना है कि देश की दिनों दिन बढ़ती ऊर्जा संबंधी जरूरतों पर ध्यान देते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने कुछ ऐतिहासिक फैसले किए हैं। इसी कड़ी में मोदी सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यूएई के साथ एक अहम समझौता करते हुए 40 साल के लिए लोअर जकूम तेल क्षेत्र से निकलने वाले तेल की 10 फीसदी हिस्सेदारी का समझौता किया है। भौगोलिक दृष्टि से यूएई से भारत की दूरी भी अपेक्षाकृत काफी कम है, इसलिए वहां से तेल लाने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी। उनका कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार ने सालों से भारत यूएई के बीच एक क्रेता और विक्रेता के संबंधों से आगे जाकर नई परिभाषा गढ़ी है। अब भारत और यूएई तेल क्षेत्र में एक निवेशक और साझेदार की नई भूमिका में हैं। 


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बता दें कि UAE के पास दुनिया में तेल का 7वां और प्राकृतिक गैस का 17वां सबसे बड़ा भंडार है। वित्तवर्ष 2015-16 के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत और यूएई के बीच इस दौरान 60 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। बहरहाल अगले पांच सालों के लिए दोनों ही देशों ने अपने व्यापार को 60 फीसदी बढ़ाने की बात कही है। 

वहीं अगर भारत में तेल की मांग को लेकर बात की जाए तो इस समय यह करीब 40 लाख बैरल के करीब है। जानकारों का कहना है कि भारत मे विकास की रफ्तार को देखते हुए आने वाले दो दशक के बाद यह मांग करीब 100 लाख बैरल के भी पार जा सकती है। वहीं अगर दुनिया में मौजूद तेल भंडारों का आकलन करें तो सामने आता है कि इन भंडारों से आगामी करीब पांच दशक तक की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।  

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