Monday, October 23, 2017

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सावधान...जीवाणुओं पर बेअसर साबित हो रही हैं पुरानी एंटीबायोटिक दवाएं, नहीं चेते तो 1 करोड़ लोग मरेंगे सालाना

अंग्वाल न्यूज डेस्क
सावधान...जीवाणुओं पर बेअसर साबित हो रही हैं पुरानी एंटीबायोटिक दवाएं, नहीं चेते तो 1 करोड़ लोग मरेंगे सालाना

 

नई दिल्ली । कई बार आपको किसी बीमारी में डॉक्टर द्वारा दी जा रही एंटीबायोटिक दवाएं कारगर साबित होती नहीं दिखती होगी। आप डॉक्टर से दवाई बदलने की बात कहते होंगे लेकिन इस सब से कुछ फायदा नहीं होने वाला। असल में हमारी पुरानी एंटीबायोटिक दवाओं ने जीवाणुओं पर काम करना बंद कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)  ने बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में इस बात खुलासा करते हुए कहा है कि प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर चुके इन जीवाणुओं को खत्म करने के लिए अब ये पुरानी एंटीबयोटिक दवाएं काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में जरूरत है, कुछ नए शोध कर नई एंटीबायोटिक इजाद करने की, जिससे इन जीवाणुओं को खत्म किया जा सके। 

बढ़ सकता है मौत का आंकड़ा

WHO ने अपनी रिपोर्ट में इस संकट पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जीवाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से असरदार एंटीबायोटिक दवाओं का संकट पैदा हो रहा है। आने वाले समय में यह संकट और व्यापक रूप ले सकता है। अगर जल्द ही इस स्थिति में कोई सुधार नहीं आया तो आने वाले समय में इस संकट के चलते लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ेगा। WHO ने इस आपात की स्थिति करार देते हुए जल्द ही नए एंटीबायोटिक पर काम करने का समय बताया। संगठन की ओर से कहा गया है कि यह स्थिति किसी देश या प्रांत विशेष की नहीं है, बल्कि यह संकट पूरी पृथ्वी पर है। ऐसे में विश्व को इस मुद्दे पर एकजुट होकर आगे आना होगा। 

मौत का आंकड़ा हो जाएगा 1 करोड़ सालाना 


विश्व स्वास्थ संगठन की ओर से कहा गया है कि अभी एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस की वजह से पूरी दूनिया में करीब 7 लाख लोगों की मौत होती है, लेकिन ऐसी आशंका जताई जा रही है कि 2050 तक यह आंकड़ा 1 करोड़ सालाना हो सकता है। हालांकि इस रिपोर्ट में मौत के आंकड़ों को हर देश के हिसाब से पेश नहीं किया गया है, लेकिन साफ किया गया है कि जहां एंटीबायोटिक का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, वहां मौत का आंकड़ा भी ज्यादा होगा। इस सब के बीच यह बात साफ है कि भारत में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल अंधाधुंध तरीके से होता है। 

118 में से 24 दवाएं किसी काम की नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूद जीवाणुओं ने अपनी प्रतिरोधक क्षमता को पिछले कुछ समय की तुलना में काफी बढ़ा लिया है। ऐसे में पुराने शोध के अनुसार बनाई गई एंटीबायोटिक दवाओं का उन पर कोई असर नहीं है। इस समय करीब 22 समूहों की 118 एंटीबायोटिक दवाएं बाजार में मौजूद हैं, जिनमें से करीब 24 दवाएं अब रोग में मरीज को कोई राहत नहीं पहुंचाती, क्योंकि जीवाणुओं पर उन एंटीबायोटिक दवाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 

मात्र 8 दवाओं पर शोध नया

जानकारी के अनुसार, इस स्थिति से निपटने के लिए यूं तो दुनिया भर में 51 नई एंटीबायोटिक दवाओं पर काम चल रहा है लेकिन WHO सिर्फ इनमें से 8 दवाओं पर हो रहे काम को ही नया मानता है। शेष एंटीबायोटिक को लेकर जो काम चल रहा है वह पुरानी दवाओं में ही सुधार है। ऐसे में विश्व स्वास्थ संगठन ने चिंता जताई है कि जिन दवाओं का असर तेजी से खत्म हो रहा है, उनकी संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि जिन नई दवाओं पर काम हो रहा है, उनकी संख्या काफी कम है।

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