Saturday, August 18, 2018

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GST का विरोध नहीं, एक राष्ट्र-एक कर की अवधारणा है तो 3 प्रशासनिक संरचना में क्यों बांटा - FAIVM संयोजक राजेश्वर पैनुली

अंग्वाल संवाददाता
GST का विरोध नहीं, एक राष्ट्र-एक कर की अवधारणा है तो 3 प्रशासनिक संरचना में क्यों बांटा - FAIVM संयोजक राजेश्वर पैनुली

नई दिल्ली । केंद्र की मोदी सरकार ने देश में नोटबंदी के बाद गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी GST को भी लागू कर दिया है। जहां एक ओर सरकार अपने इस फैसले को दूरगामी परिणाम वाला करार दे रही है, वहीं विपक्ष समेत कई संगठन  सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। अमूमन राजनीतिक दल और व्यापारिक संगठन GST का विरोध न करते हुए इसके सरलीकरण और सुधारों की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में पिछले दिनों फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के तत्वावधान में GST महामंथन का आयोजन किया गया, जिसमें इसके सरलीकरण और सुधारीकरण को लेकर चर्चा की गई। इस मुद्दे को लेकर अंग्वाल न्यूज ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के संयोजक और राष्ट्रीय प्रवक्ता सीए राजेश्वर पैनुली से बात की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने GST लागू होने के बावजूद उसमें किए गए बदलावों के बाद भी कुछ अन्य बदलावों और इसके सरलीकरण समेत कर सुधारों की जरूरत पर बल दिया। 

जटिल है जीएसटी की कर प्रणाली

बातचीत में फेडरेशन के संयोजक राजेश्वर पैनुली ने कहा कि मौजूदा दौर में जीएसटी की कर प्रणाली काफी जटिल है। इतना ही नहीं जीएसटी पोर्टल के काम न करने से भी लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए हमने E way Bill समेत कई अहम बिंदुओं को लेकर पिछले दिनों जीएसटी पर महामंथन का आयोजन किया था, जिसमें राजनीतिक दलों के कई प्रतिनिधियों समेत कई जाने माने लोगों ने शिरकत की। इस दौरान हमने कुछ बिंदुओं पर गहन चर्चा केसाथ एक मांग पत्र तैयार किया है, जो हमने सरकार को दिया है।

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जीएसटी को 3 प्रशासनिक संरचना  में क्यों बांटा...?

सीए राजेश्वर पैनुली का कहना है कि जब GST एक कर है तो सरकार ने उसे 3 प्रशासनिक संरचना में क्यों बाँट दिया |  SGST,CGST, IGST, को Invoice में क्यों अलग-अलग करने दर्शाया जाना आवश्यक है ! टैक्स के Challan में भी उपरोक्त SGST, CGST, IGST, अलग-अलग क्यों भरने पड़ते हैं! कारोबारी CGST, के स्थान में IGST या IGST के स्थान में SGST कर चालान जमा करा देता है! और यह ऐसी गलती हैं जो कारोबारी अक्सर करता है और नुकसान उठाता है ! एकत्रित किये गए टैक्स को सरकार अपने द्वारा SGST, CGST & IGST में बांटें और राज्यों के बीच वितरित करें | जब GST ने सम्पूर्ण राष्ट्र को एक “कर” की छतरी में लेकर खड़ा कर दिया है तो प्रत्येक राज्य में कारोबार करने के लिए अलग अलग पंजीकरण कराने की आवश्यकता क्यों है! एक ही पंजीकरण से सम्पूर्ण भारत में व्यापार करने की छूट हो ।

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कारोबारियों को भी तीन श्रेणी में बांटा...

पैनुली के मुताबिक, वर्तमान GST कानून ने कारोबारियों को तीन श्रेणी में बाँट दिया है जैसे (a) सेवा क्षेत्र (b) निर्माता (c) विक्रेता, एक राष्ट्र एक कर की अवधारणा में कारोबार भी एक ही होना चाहिए ! वर्तमान में 20 लाख तक  के कारोबार पर सेवा क्षेत्र एवं अन्य क्षेत्र कर मुक्त है। परन्तु अपंजीकृत 20 लाख तक के सेवा क्षेत्र का कारोबारी अंतरराज्यीय कारोबार करने के लिए स्वतंत्र है जबकि एक अपंजीकृत 20 लाख और कुछ राज्यों में 10 लाख तक की विक्री करने वाला व्यापारी सिर्फ अपने राज्य में ही व्यापार कर सकता है तो यह भेदभाव न हो। 

इन पर ध्यान देने की जरूरत

उन्होंने कहा कि 20 लाख रूपये तक के कारोबारी GST मुक्त हैं। उन्हें पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है बशर्ते उक्त कारोबारी (सेवा क्षेत्र को छोड़कर) अंतरराज्यीय व्यापार न करता हो | इसमें दो संशोधन की आवश्यकता है I

1- उक्त 20 लाख की सीमा को बढ़ाकर 50 लाख कर दिया जाय |

2- अंतर राज्यीय व्यापार न करने की शर्त से सभी प्रकार के कारोबारियों को मुक्त किया जाय।|

3- सभी प्रकार के कारोबारियों को त्रिमासिक विवरणी दाखिल करने की सुविधा होने चाहिए! यधपि कर का भुगतान स्वनिर्धारण प्रक्रिया के आधार में मासिक जमा कराया जा सकता है |

4- कम्पोजीशन सुविधा सभी प्रकार के कारोबारियों को प्राप्त होनी चाहिए ! कम्पोजीशन सुविधा सेवा क्षेत्र को भी उपलब्ध होनी चाहिए 

5- कम्पोजीशन का दायरा 1.50 करोड़ से बढ़ाकर 3.00 करोड़ करना चाहिए ! महंगाई के चलते एक लाख रूपये रोज का कारोबार एक आम बात है ! वर्तमान में कम्पोजीशन स्कीम में दो  रेटों का प्रावधान है जैसे की ट्रेडर्स वं मैन्युफैक्चरर 1% एवं रेस्टोरेंट 5%, चूँकि कम्पोजीशन में इनपुट क्रेडिट नही मिलता अतः सिर्फ एक दर होने चाहिए और यह दर 1% होनी चाहिए |

एक कारोबारी एक कर की होगी अवधारण

सीए राजेश्वर पैनुली का कहना है कि सरकार जीएसटी को एक राष्ट्र एक कर कहती है लेकिन इसके साथ ही इसकी अवधारणा भी एक कारोबार एक कर की होनी चाहिए।  ऐसे बहुत से व्यवसाय हैं जिसमे GST के चारों दरों 5%, 12% 18% एवं 28% का परिचालन है। ऐसे कारोबारियों को सदैव डर लगा रहता है की GST लगाने में करों में कोई त्रुटि न रह जाए। ऐसे अनेक उदाहरण बिजली, बिल्डिंग मटेरियल जैसे कारोबार में मिल जाएंगे ऐसे में एक प्रकार के ट्रेड में एक ही दर लागू होने चाहिए। ऐसे बहुत से कारोबार हैं जहाँ पर इनपुट GST के दरें 28% / 18% हैं और और आउटपुट GST की दरें 18% / 12% या कम हैं ! ऐसे कारोबारियों पर इनपुट GST का बैलेंस बहुत ज्यादा एकत्रित हो जाता है और बहुमूल्य वर्किंग कैपिटल इनपुट GST में फंस जाता है। अतः या तो त्वरित रिफंड की प्रक्रिया हो या इनपुट और  आउटपुट GST दरों में एक समानता हो।  अतः एक कारोबार एक कर की परिकल्पना अति आवश्यक है। 

अव्यवहारिक है E Way Bill

वहीं उन्होंने E Way Bill को व्यापारियों के कन्धों पर अनावश्यक रूप से सौपा भार करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अव्यवहारिक है और E Way Bill की निहित शर्तें पूरी कर पाना बेहद मुश्किल है। E way Bill पर हर राज्य ने अपने अपने अलग कानून एवं प्रक्रिया बनाई है जिनका पालन कारोबारियों एवं ट्रांसपोर्टरों द्वारा अत्यंत कठिन है। अतः E Way Bill को सभी राज्यों में समाप्त किया जाना चाहिए।  अगर सरकार फिर भी दृढ़ है और उसे कुछ व्यवहारिक समस्या है उस स्थिति में :

(i)     E Way Bill का क्रियान्वयन कम से कम 30 सितम्बर 2018 तक स्थगित किया जाय |

(ii)    E Way Bill  की वर्तमान सीमा INR 50,000/- जो की बहुत सी अव्यवाहरिक है इस सीमा को भी कम से कम INR 3,00,000/ तक कर दिया जाय |

(iii)    E Way Bill  में ट्रांसपोर्ट करने के समय की पाबन्दी पूर्ण रूप से समाप्त कर दी जाय |    

(iv)    E Way  Bill हेतु सभी राज्य में समान कानून एवं समान प्रक्रिया होनी चाहिए | E Way  Bill का अधिकार एवं कार्यक्षेत्र सिर्फ केंद्रीय होना चाहिए |

इन मुद्दों पर सरकार दे ध्यान....

1- Reverse  Charge  (RCM ) जो अभी तक 31 मार्च 2018 तक लंबित है को पूर्ण रूप से समाप्त कर देना चाहिए ! RCM में न तो सरकार को कोई अतिरिक्त लाभ है और कारोबारियों के लिए यह एक बहुत बड़ा सिरदर्द है ! अतः इस प्रावधान को समाप्त कर देना चाहिए | 


2-GST के सरलीकरण एवं सुधारीकरण के प्रक्रिया के अंतरगत अभी तक सैकड़ों Circular  Issue हो चुके हैं | कारोबारी तो कारोबारी, GST अधिकारी भी भूल चुके है की कौन सा Circular कब और किस विषय पर निकला था।  अतः अभी तक के सभी Circular को निरस्त करें, GST Act में सभी बदलावों का समावेश करके एक नया GST Act एवं Rule बनाया जाय ! From 3B, GST के ओरिजिनल एक्ट में कही भी अंकित नहीं है। 

3- GST कानून में प्रावधान होना चाहिए की GST का कोई भी अधिकारी किसी कारोबारी के यहाँ जाँच के लिए जाने से पूर्व अपने साथ संबंधित मार्किट एसोसिएशन के किसी प्रतिनिधि का लेकर जाये | इससे कारोबारियों का उत्पीड़न कम हो सकता है |

4-GST में जहाँ जहाँ Turnover शब्द आता है वहां Turnover में करमुक्त या Zero Tax वस्तुओं एवं सेवाओं की Turnover शामिल नहीं होने चाहिए ! कर मुक्त व्यवसाय एवं Zero Tax वस्तुएं सम्पूर्ण रूप से GST की Turnover की परिभाषा में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए। 

5- यदि कोई कारोबारी एकत्र किया हुआ GST सरकारी खाते में जमा नहीं करता या GST सरकारी खाते में जमा करने के उपरांत GST विवरणी दाखिल नहीं करता, ऐसी अवस्था में क्रेता कारोबारी का input Tax Credit से वंचित नहीं करना चाहिए बल्कि उक्त क्रेता कारोबारी का सुचना के आधार पर टैक्स/विवरणी जमा न करने वाले कारोबारी का दण्डित करना चाहिए ! वर्तमान में ऐसी दशा में क्रेता व्यापारी, जिसने Input GST का भुगतान किया है, दंडित होता है क्योंकि उसे Input GST Credit नहीं मिलता। 6- यदि कारोबारी द्वारा किसी फॉर्म का भरते समय कोई त्रुटि हो जाती है तो एक निश्चित समय सीमा के भीतर उस त्रुटि को ठीक करने की व्यवस्था होनी चाहिए तथा GST Return को Revise करने की भी सुविधा होनी चाहिए। 

7- GST के नए पंजीकरण हेतु अभी आवश्यकता से ज्यादा समय लग रहा है और प्रक्रिया भी कड़ी है, GST पंजीकरण प्रक्रिया का सुगम एवं सरल बनाने की आवश्यकता है |

8- GST विवरणी इतनी पेचीदा है की किसी आम कारोबारी तो दूर, दूर दराज में बैठे पेशेवर भी नहीं भर पा रहे हैं | कर का अनुपालन यदि सुगम होता है तो कर का संग्रह खुद ब खुद बढ़ जाता है | बताया गया है की CMP -03 किसी के समझ में नहीं आया और अंतिम तिथि तक भी कोई कारोबारी उसे भर नहीं पाया GST के अंतर्गत जितनी भी विवरणी है सभी सरल एवं सुगम होनी चाहिए। 

9- वस्तु एवं सेवा क्षेत्र के कारोबारियों का निर्माता के सभी निर्यात के समय Letter of  Undertaking देनी पड़ती है ! यह प्रक्रिया समाप्त होनी चाहिए और वर्ष के अंत में कारोबारियों द्वारा एक मिलान विवरणी बनाकर GST विभाग का सौंप देना ही काफी है ! अतः निर्यातकों का L . O .U . से मिक्त किया जाना चाहिए। 

10- Refund  प्रक्रिया को त्वरित एवं सुगम बनाने की आवश्यकता है । 

11- GST कानून में आयकर के भांति TDS एवं TCS के प्रावधान हों जिससे कुछ व्यापारिक लेन देन पर कारोबारी को TDS काट कर सरकार को जमा करना पड़ता है ! यह प्रावधान कारोबारियों के कंधे पर एक बोझ है और अनावश्यक कार्य है ! GST में निहित TDS एवं TCS के प्रावधानों को तुरंत समाप्त किया जाया चाहिए । 

12- GST की तकनीकि खराबी के कारण होने वाली देरी से अभी तक कारोबारियों ने जो दंड भुगतान किया है वह तुरंत वापस होना चाहिए | 31 मार्च 2018 तक GST में किसी भी प्रकार का दंड, शुल्क, व्याज इत्यादि से छूट का प्रावधान होना चाहिए |

13-  GST सरकार द्वारा जारी Circular एवं Notification अत्यंत सरल भाषा में होने चाहिए ताकि एक आम एवं कम पढ़ा लिखा कारोबारी CIrcular एवं Notification में अंकित प्रावधान आसानी से पढ़ सके, समझ सके एवं अमल में ला सके |

14-  Composition एवं अपंजीकृत कारोबारियों द्वारा किया जा रहा कारोबार (Turnover) के निर्धारण हेतु कारोबारियों द्वारा घोषित Trunover को ही अंतिम माना जाय |

15- Anti Profiteering Council के अंतर्गत कारोबारी जगत को भरपूर भागीदारी सुनिश्चित की जाय | Anti Profiteering Council में कारोबारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों पर सम्बंधित व्यापार मंडल एवं Trade Association के प्रतिनिधियों से सलाह मश्वरा के बाद ही कुछ कार्यवाही की जाए |

16-केंद्र सरकार यह भी स्पष्ट करे कि GST लगने के बाद, राज्य या स्थानीय निकाय कौन कौन से Tax नहीं लगा सकते, उदाहरण के लिए बहुत से राज्यों में स्थानीय निकाय द्वारा कारोबारियों पर Professional Tax लगाया जाता है | राज्य मण्डियों में व्यापार कर रहे व्यापारियों से मंडी शुल्क वसूलते हैं | अतः Professional Tax एवं मंडी शुल्क पर तुरंत प्रतिबंध लंगना चाहिए एवं राज्यों की सभी उस शक्तियों पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए जिस के द्वारा कारोबारियों पर राज्य या स्थानीय निकाय टैक्स लगाती हैं |  

17- HSN Code के अंतर्गत बहुत से सामानों के वर्गीकरण में विसंगतियां हैं | इन विसंगतियों के चलते एक ही प्रकार के सामानों कि व्याख्या एवं वर्गीकरण में अंतर आने से अलग अलग GST के दरें लग जाती है | खान पान कि वस्तुओं में ऐसे उदाहरण बहुत देखे जा रहे हैं | अतः वस्तुओं का HSN Code के हिसाब से वर्गीकरण व्यवाहरिक करा जाय |

18- GST में अभी तक वस्तुओं की वापसी और सेवाएं निरस्त होने की स्थिति में टैक्स क्रेडिट/रिफंड की बहुत जटिल प्रक्रिया है, खासकर की फार्मास्युटिकल्स/दवाई विक्रेता जिनका माल किसी भी कारण से क्षतिग्रस्त हो जाता है उस पर रिफंड, GST रिफंड प्रक्रिया पेचीदा होने के वजह से दुकानदार से निर्माताओं को वापस नहीं हो पा रहा है | अतः सरकार से निवेदन है की मॉल वापसी या सेवाएं निरस्त होने की स्थिति में जमा किये हुए GST का क्रेडिट सुगमता पूर्वक प्रदान किया जाय |

19-यदि किसी व्यापारी को किसी भी कारणवश GST पंजीकरण रद्द करना हो तो GST पोर्टल पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि व्यापारी अपना पंजीकरण रद्द करा सके । यह उन व्यापारिओं के लिए परेशानी का सबब है जिनका व्यापार बंद हो चुका है और पंजीकरण के रद्द ना होने के चलते जबरदस्ती GST की विवरणी दाखिल करनी पड़ रही है ।

20- अपना मॉल जॉब वर्क की  लिए भेजने पर जो चालान माल की साथ भेजा जाता है, उसका त्रिमासिक विवरणी ITC -04 भरना पड़ता है । यह एक व्यापारी पर अनावश्यक कार्य है । अतः जॉब वर्क हेतु ITC - 04 एवं E -way Bill क़ी व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए ।

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