Friday, April 26, 2019

Breaking News

   भाजपा के संकल्प पत्र में आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा     ||   सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव में ईवीएम और वीवीपैट के मिलान को पांच गुना बढ़ाया    ||    दिल्लीः NGT ने जर्मन कार कंपनी वोक्सवैगन पर 500 करोड़ का जुर्माना ठोंका     ||    दिल्लीः राहुल गांधी 11 मार्च को बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे     ||    हैदराबाद: टीका लगाने के बाद एक बच्चे की मौत, 16 बीमार पड़े     ||   मध्य प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर होंगे सलमान खान, CM कमलनाथ ने दी जानकारी     ||   पाकिस्तान को FATF से मिली राहत, ग्रे लिस्ट में रहेगा बरकरार     ||   आय से अधिक संपत्ति केसः हिमाचल के पूर्व CM वीरभद्र सिंह के खिलाफ आरोप तय     ||   भीमा-कोरेगांव केसः बॉम्बे HC ने आनंद तेलतुंबड़े की याचिका पर सुनवाई 27 तक टाली     ||   हिमाचल प्रदेश: किन्नौर जिले में आया भूकंप, तीव्रता 3.5     ||

बढ़ते एनपीए को लेकर पूर्व आरबीआई गवर्नर का बड़ा बयान, यूपीए को ठहराया जिम्मेदार

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बढ़ते एनपीए को लेकर पूर्व आरबीआई गवर्नर का बड़ा बयान, यूपीए को ठहराया जिम्मेदार

नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई और देश की सुस्त आर्थिक रफ्तार के बीच एनडीए सरकार को थोड़ी राहत मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इसके लिए यूपीए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। रघुराम राजन ने संसदीय समिति को बताया कि बैंकों के अति आशावान, सरकार की नीतिगत प्रक्रिया में सुस्ती और आर्थिक विकास की धीमी प्रक्रिया जैसे कारक डूबे हुए कर्ज (एनपीए) की राशि बढ़ाने में मुख्य रूप से जिम्मेदार थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में बैंकों से भी गलतियां हुईं। बैंकों ने पुराने विकास दर और भविष्य की कार्ययोजना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते रहे। रघुराम राजन ने कहा कि एनपीए का बड़ा हिस्सा 2006 से 2008 के दौरान बढ़ा है।

गौरतलब है कि संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी को सौंपी गई रिपोर्ट में रघुराम राजन ने कहा कि यूपीए और एनडीए दोनों ही सरकारों में कई तरह की शासन संबंधी समस्याएं थीं। रघुराम राजन ने कोयला खदानों का आवंटन संदिग्ध तरीके से किया गया था और उसके बाद जांच के डर ने सरकार की योजनाओं पर उल्टा असर किया।

ये भी पढ़ें - अगले महीने होने वाले इंवेस्टर्स समिट की तैयारियां जोरों पर, उद्यमियों की पहल का पीएम लेंगे जायजा 


यहां बता दें कि रघुराम राजन ने कहा कि एनपीए का बड़ा हिस्सा 2006 से 2008 के दौरान बढ़ा, जबकि उस समय आर्थिक विकास दर मजबूत स्थिति में थी। आज भी यह स्थिति है कि सरकारी योजनाएं तेजी से अमल में नहीं आ पा रहीं हैं। इससे उसकी लगात और एनपीए की राशि लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में बिजली की आपूर्ति एक बड़ी समस्या है लेकिन इससे जुड़ी परियोजनाएं शुरू ही नहीं हो पा रहीं हैं। पूर्व आरबीआई गवर्नर ने कहा कि एनपीए की राशि को बढ़ाने में बैंक भी जिम्मेदार रहे हैं। उन्होंने प्रमोटरों की बिना जांच-पड़ताल किए उनके निवेश के आधार पर उन्हें करोड़ों रुपये के लोन दे दिए।

 

Todays Beets: