Monday, December 17, 2018

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सोनिया गांधी ने किया सास इंदिरा के उस 'आदेश' का खुलासा, जिसके बाद बदल गई यूपीए चेयरपर्सन की जिंदगी

अंग्वाल न्यूज डेस्क
सोनिया गांधी ने किया सास इंदिरा के उस

नई दिल्ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने शुक्रवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं को भी सबके सामने जाहिर किया। उन्होंने खुलासा किया कि आखिर किसके कहने पर और किस तरह उन्होंने भारत में आकर हिंदी बोलना सीखा, जबकि वह अंग्रेजी भी नहीं जानती थीं, उन्हें सिर्फ फ्रेंच भाषा ही आती थी। सोनिया गांधी ने कहा कि मेरी सास ( पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) उनसे घर पर रहने के दौरान सिर्फ हिंदी में बात करने की बात कहती थीं। ऐसे में उन्होंने दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित एक छोटे से इस्टीट्यूट में हिन्दी स्पीकिंग का कोर्स किया। उस कोर्स की वजह से ही मैंने हिन्दी की व्याकरण सीखी और फिर सार्वजनिक तौर पर भी हिन्दी बोलना शुरू कर दिया।

हिंदी क्या अंग्रेजी भी नहीं जानती थी

असल में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन अरुण पुरी ने सोनिया से बीते सालों में उनमें आए बदलावों के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में आपमें कई बदलाव नजर आए। पहले आप नेता बनीं और फिर हिन्ही में भी बोलने लगीं। ये सब कितना मुश्किल था। इस सवाल के जवाब में सोनिया गांधी ने कहा- हां मैं पहले अंग्रजी भी नहीं जानती थी और मुझे इसके लिए कई चुनौतियां का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक रैलियों में बोलना मेरे लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है और वो भी अगर हिन्दी में बोलना हो तो काफी दिक्कत होती है। लेकिन अब मैं अंग्रजी के साथ-साथ हिन्दी भी बोल सकती हूं।

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राजनीति में कभी नहीं आना चाहती थी


इस दौरान सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक सफरनामे पर भी कुछ बातें कहीं। उन्होंने बताया कि सास इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह नहीं चाहती थीं कि उनके पति राजीव गांधी राजनीति में जाएं, लेकिन हालात ऐसे हो गए थे कि उन्हें राजनीति में आना पड़ा। वह खुद भी कभी राजनीति में नहीं आना चाहती थी लेकिन एक बार फिर समय ऐसा पलटा कि ना चाहते हुए भी मजबूरी में मुझे राजनीति में आना पड़ा। 

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6-7 साल लग गए फैसला लेने में

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने इस दौरान कहा कि मेरे लिए राजनीति में आने का फैसला लेना बिल्कुल भी आसान नहीं था। राजनीति में आने के लिए अंतिम निर्णय लेने में मुझे 6-7 साल का समय लग गया। उस दौरान कांग्रेस कई तरह के संकट से घिरी हुई थी। मैंने कुछ अलग करने की कोशिश की, और इस उम्मीद से राजनीति में आई। मेरा राजनीति में आना भी मजबूरी ही थी। अगर मैं ऐसा नहीं करती तो लोग मुझे कायर कहते।

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