Saturday, February 23, 2019

Breaking News

   पाकिस्तान को FATF से मिली राहत, ग्रे लिस्ट में रहेगा बरकरार     ||   आय से अधिक संपत्ति केसः हिमाचल के पूर्व CM वीरभद्र सिंह के खिलाफ आरोप तय     ||   भीमा-कोरेगांव केसः बॉम्बे HC ने आनंद तेलतुंबड़े की याचिका पर सुनवाई 27 तक टाली     ||   हिमाचल प्रदेश: किन्नौर जिले में आया भूकंप, तीव्रता 3.5     ||   PAK सेना के ISPR के डीजी ने कहा- हम युद्ध की तैयारी नहीं कर रहे, भारत धमकी दे रहा है     ||   ICC को खत लिखेगी BCCI- आतंक समर्थक देश के साथ खत्म हो क्रिकेट संबंध     ||   महाराष्ट्रः ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा चलाई गई शकुंतला नैरो गेज ट्रेन में लगी आग     ||   केरलः दक्षिण पश्चिम तट से अवैध तरीके से भारत में घुसते 3 लोग गिरफ्तार     ||   ताबड़तोड़ एनकाउंटर पर योगी सरकार को SC का नोटिस, CJI बोले- विस्तृत सुनवाई की जरूरत     ||   तेहरान में बोइंग 707 किर्गिज कार्गो प्लेन क्रैश, 10 क्रू मेंबर की मौत     ||

भाजपा ने गोवा-मणिपुर में चला था जो दांव, कर्नाटक में उल्टा पड़ा गले , अब राज्यपाल अपने विवेक से देंगे सरकार बनाने का निमंत्रण

अंग्वाल न्यूज डेस्क
भाजपा ने गोवा-मणिपुर में चला था जो दांव, कर्नाटक में उल्टा पड़ा गले , अब राज्यपाल अपने विवेक से देंगे सरकार बनाने का निमंत्रण

नई दिल्ली । कर्नाटक चुनावों में भले ही भारतीय जनता पार्टी को बड़ी सफलता मिली हो लेकिन पार्टी की इस बड़ी जीत का जश्न उनकी की एक पुरानी रणनीति के चलते फीका पड़ता नजर आ रहा है। करीब 105 सीटों के करीब रहकर पूर्ण बहुमत से मात्र कुछ सीट से रह जाने वाली भाजपा को चुनावों में दूसरे नंबर पर रहने वाली कांग्रेस और तीसरे नंबर पर आने वाली जेडीएस ने एक करारा झटका देने की रणनीति बना ली है। असल में कांग्रेस ने जेडीएस को बिना शर्त बाहर से समर्थन देकर उनकी सरकार बनाने का ऐलान किया है, जिसके बाद जेडीएस ने भी इस गठबंधन की सरकार को लेकर अपनी सहमति दे दी है।

यानी दूसरे नंबर की पार्टी कांग्रेस (करीब 77 सीट) और जेडीएस (करीब 38) एक दूसरे के समर्थन से 115 सीटों का बहुमत पाकर कर्नाटक के किले को जीतती नजर आ रहीं हैं, जबकि सूबे में करीब 105 सीटों पर जीतने वाली भाजपा सत्ता से दूर रह जाएगी। अब ऐसे में पूर्व में गोवा और मणिपुर में भाजपा ने अपनी जिस रणनीति से कांग्रेस को सत्ता से दूर किया था, वहीं रणनीति अब कांग्रेस कर्नाटक में भाजपा के खिलाफ अपना रही है, हालांकि अब सब कुछ राज्यपाल के विवेक पर निर्भर हो गया है, वह चाहें तो गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं और वह चाहें तो सूबे की सबसे बड़ी पार्टी को न्योता दे सकते हैं, लेकिन पूर्व में गोवा और मणिपुर में भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी होने के बावजूद गठबंधन की सरकार बनाने में सफल हुई थी।

ये भी पढ़ें -  सोनिया ने देवगौड़ा से बात करने के लिए गुलाम नबी आजाद को दिए निर्देश, पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहते

असल में कांग्रेस ने इस बार भाजपा को उसकी ही एक चाल में फंसा दिया है। पूर्व में  गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार बनाने में पिछड़ गई थी। मणिपुर में 60 में से कांग्रेस को 28 सीट, जबकि भाजपा ने 21 सीट जीती थी। पर भाजपा सरकार बनाने में सफल रही। वहीं, 40 सीट वाली गोवा विधानसभा में भी कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं। जबकि भाजपा 13 सीटों पर जीती।  पर दोनों राज्यों में भाजपा दूसरे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने में कामयाब हुई। 

ये भी पढ़ें - जेडीएस को बाहर के समर्थन देंगी कांग्रेस, शाम 5 बजे राज्यपाल को इस्तीफा देंगे सिद्धरमैया


अब कर्नाटक चुनावों में कांग्रेस का कहना है कि पूर्व की भांति सबसे बड़े गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता मिलना चाहिए। पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पूर्व में भाजपा इस तरह से गोवा और मणिपुर में सरकार बना चुकी है। उस दौरान राज्यों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन राज्यपाल ने भी भाजपा को सरकार बनाने को न्योता दिया। अब हमने कर्नाटक में कुछ इस तरह का प्रस्ताव जेडीएस के समर्थन में दिया है। हमने राज्यपाल ऑफिस में अपने समर्थन वाला प्रस्ताव भेज दिया है। 

ये भी पढ़ें - पीएम के दौरे से पहले पाक की ‘नापाक’ हरकत, सांबा में तोड़ा सीजफायर, बीएसएफ का 1 जवान शहीद

हालांकि इस सब से इतर भाजपा ने भी अपनी मोर्चाबंदी करने के साथ ही अपने कुछ दिग्गज नेताओं को बेंगलुरू के लिए रवाना कर दिया है। शाम को येदुरप्पा भी राज्यपाल से मिलकर भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उन्हें सरकार बनाने का न्योता पहले दिए जाने की मांग करेंगे। 

बहरहाल, इस सब के बावजूद कर्नाटक की सत्ता पर अब कौन काबिज होगा, इसका पूरा फैसला अब राज्यपाल के हाथों में आ गया है। दोपहर में जब जेडीएस और कांग्रेस ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा तो उन्होंने साफ कर दिया था कि पूर्ण नतीजें आने के बाद ही वह किसी भी दल से मुलाकात करेंगे। इससे पहले वह किसी भी दल से मुलाकात नहीं करेंगे।

Todays Beets: