Thursday, August 16, 2018

Breaking News

   मंगल ग्रह पर आशियाना बनाएगा इंसान, वैज्ञानिकों को मिली पानी की सबसे बड़ी झील     ||   भाजपा नेता का अटपटा ज्ञान, 'मृत्युशैया पर हुमायूं ने बाबर से कहा था, गायों का सम्मान करो'     ||   आज से एक हुए IDEA-वोडाफोन! अब बनेगी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी     ||   गोवा में बड़ी संख्‍या में लोग बीफ खाते हैं, आप उन्‍हें नहीं रोक सकते: बीजेपी विधायक     ||   चीन फिर चल रहा 'चाल', डोकलाम में चुपचाप फिर शुरू कीं गतिविधियां : अमेरिकी अधिकारी     ||   नीरव मोदी, चोकसी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 25-26 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश     ||   जापान में फ़्लैश फ्लड से 200 लोगों की मौत     ||   देहरादून में जलभराव पर सरकार ने लिया संज्ञान अधिकारियों को दिए निर्देश     ||   भारत ने टॉस जीता फील्डिंग करने का फैसला     ||   उपेन्द्र राय मनी लाउंड्रिंग मामले में सीबीआई ने 2 अधिकारियों को गिरफ्तार किया     ||

मैक्स अस्पताल में ‘मृत’ घोषित बच्चे ने पीतमपुरा में तोड़ा दम, अस्पताल के बाहर पुलिस तैनात

अंग्वाल न्यूज डेस्क
मैक्स अस्पताल में ‘मृत’ घोषित बच्चे ने पीतमपुरा में तोड़ा दम, अस्पताल के बाहर पुलिस तैनात

नई दिल्ली। दिल्ली के मैक्स अस्पताल के डाॅक्टरों द्वारा ‘मृत’ घोषित बच्चे ने आज सही मायनों में पीतमपुरा के अग्रवाल अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। नवजात की मौत के बाद हंगामे की आंशका को देखते हुए अस्पताल के बाहर भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बता दें कि शालीमार के मैक्स अस्पताल ने हाल ही में पैदा हुए जुड़वां बच्चे को मृत घोषित कर दिया था जबकि उनमें से एक जिन्दा था। इसके बाद कई डॉक्टरों को निलंबित भी किया गया। 

डाॅक्टरों पर गिरी गाज

आपको बता दें कि जुड़वां बच्चों में से जिंदा पाए गए बच्चे का इलाज पीतमपुरा के अग्रवाल अस्पताल में चल रहा था, हालांकि वहां के डॉक्टरों ने भी उसके बचने की  आशंका कम ही जताई थी। डॉक्टर ने बताया था कि बच्चे में संक्रमण बहुत ज्यादा फैल गया है। गौरतलब है कि बच्चों को मृत घोषित करने के बाद भी बच्चे के जिन्दा पाए जाने के बाद बच्चे के परिवार वालों की तरफ से अस्पताल पर कार्रवाई की मांग के बाद मैक्स अस्पताल ने दोषी दो डॉक्टरों को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया था। 

ये भी पढ़ें - उत्तरी दिल्ली में रहना होगा महंगा, नगर निगम वसूलेगा प्रोफेशनल और बेटरमेंट टैक्स


गाइडलाइन्स का पालन नहीं

यहां बता दें कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन के आदेश पर बनाई गई जांच कमेटी की प्राइमरी रिपोर्ट में भी अस्पताल को दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट में इसे आपराधिक लापरवाही करार दिया गया और इसपर कानूनी सलाह ली जा रही है।  अस्पताल की सबसे बड़ी गलती यह है कि नवजात बच्चे के इलाज के लिए जो मेडिकल गाइडलाइन्स हैं, उनका पालन नहीं किया गया। बच्चे को मृत घोषित करने से पहले जरूरी ईसीजी भी नहीं किया गया, अगर ऐसा होता तो पता चल जाता कि बच्चा जिंदा है या नहीं।

  

Todays Beets: