Saturday, March 23, 2019

Breaking News

    दिल्लीः NGT ने जर्मन कार कंपनी वोक्सवैगन पर 500 करोड़ का जुर्माना ठोंका     ||    दिल्लीः राहुल गांधी 11 मार्च को बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे     ||    हैदराबाद: टीका लगाने के बाद एक बच्चे की मौत, 16 बीमार पड़े     ||   मध्य प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर होंगे सलमान खान, CM कमलनाथ ने दी जानकारी     ||   पाकिस्तान को FATF से मिली राहत, ग्रे लिस्ट में रहेगा बरकरार     ||   आय से अधिक संपत्ति केसः हिमाचल के पूर्व CM वीरभद्र सिंह के खिलाफ आरोप तय     ||   भीमा-कोरेगांव केसः बॉम्बे HC ने आनंद तेलतुंबड़े की याचिका पर सुनवाई 27 तक टाली     ||   हिमाचल प्रदेश: किन्नौर जिले में आया भूकंप, तीव्रता 3.5     ||   PAK सेना के ISPR के डीजी ने कहा- हम युद्ध की तैयारी नहीं कर रहे, भारत धमकी दे रहा है     ||   ICC को खत लिखेगी BCCI- आतंक समर्थक देश के साथ खत्म हो क्रिकेट संबंध     ||

सवर्ण आरक्षण बिल के मापदंडों में हो सकते हैं बदलाव- थावरचंद गहलोत

अंग्वाल न्यूज डेस्क
सवर्ण आरक्षण बिल के मापदंडों में हो सकते हैं बदलाव- थावरचंद गहलोत

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने बड़ा दांव चलते हुए सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का बिल दोनों सदनों में पास करवा लिया। विपक्षी दलों ने न चाहते हुए भी चुनावी मौसम को देखते हुए इस बिल को पास करवाने में सरकार की मदद की लेकिन इसके मानकों को लेकर कई सवाल भी उठाए। विपक्ष के द्वारा लगातार सवाल उठाए जाने के बाद समाज कल्याण मंत्री थावरचंद गहलोत ने सफाई देते हुए कहा कि यह अंतिम नहीं है और नियमों में बदलाव हो सकता है। 

गौरतलब है कि आर्थिक तौर पर पिछड़ा की श्रेणी में आने वालों की सालाना आयसीमा 8 लाख और 5 एकड़ जमीन का मालिकाना हक के अलावा अन्य मापदंड रखे गए हैं। दोनों ही सदनों में बिल पास होने के बाद अब मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि आरक्षण के मापदंड विचाराधीन हैं और इसमें बदलाव हो सकते हैं। 

ये भी पढ़ें- पीएम मोदी को लेकर कांग्रेस नेता का बड़ा बयान, तानाशाह हिटलर से की तुलना


यहां बता दें कि ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि मंत्रालय एक हफ्ते के अंदर नियम बनाएगी। वहीं सरकार ने सभी राज्यों से अपने मापदंडों को तैयार करने के लिए कहा है। गौर करने वाली बात है कि यह आरक्षण शिक्षा और नौकरी पर लागू होगा जो राज्य के दायरे में आता है। समाज कल्याण मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि ‘‘हम आने वाले समय में देखेंगे कि कैसे राज्य इन नियमों को बनाते हैं। इनपर भी विचार किया जाएगा।’’ मंत्री ने कहा वार्षिक घरेलू आय और भूमि का संदर्भ क्रीमी लेयर के लिए मौजूदा मापदंडों से लिया गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधेयक में भूमि और आय सीमा को लेकर कोई संदर्भ नहीं है।

 

 

Todays Beets: