Friday, December 15, 2017

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भारत के पुराने दोस्त रूस ने NSG मुद्दे पर चीन-पाकिस्तान को दिया झटका, भारत से पुरानी दोस्ती निभाई

अंग्वाल न्यूज डेस्क
भारत के पुराने दोस्त रूस ने NSG मुद्दे पर चीन-पाकिस्तान को दिया झटका, भारत से पुरानी दोस्ती निभाई

नई दिल्ली । भारत के पुराने दोस्त रूस ने एक बार फिर अपनी दोस्ती को साबित करते हुए चीन और पाकिस्तान को करारा झटका दिया है। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानी एनएसजी सदस्य के रूप में भारत की दावेदारी पर मास्को की ओर से बयान आया है कि एनएसजी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को पाकिस्तान के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। इस मुद्दे पर रूस विभिन्न स्तर पर चीन के साथ बातचीत कर रहा है। मास्को का यह रुख ऐसे समय में आया है कि एनएसजी में भारत की सदस्या का चीन लंबे समय से विरोध करता आ रहा है। रूस ने भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। 

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रूसी उप विदेश मंत्री के बयान से चर्चाएं गर्म

बता दें कि रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर के साथ बुधवार को मुलाकात की। विदेश सचिव जयशंकर से मुलाकात के बाद रयाबकोव ने कहा, एनएसजी सदस्यता की दावेदारी के लिए पाकिस्तान के आवेदन पर कोई सर्वसम्मति नहीं है और इसे भारत की दावेदारी के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। खास बात यह है कि यह पहला मौका है जब रूस के किसी वरिष्ठ राजनेता ने सार्वजनिक रूप से दो मामलों को एक साथ जोड़ने पर प्रतिक्रिया दी हो। रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा- हम इस मसले की जटिलताओं से परिचित हैं, लेकिन हम उन देशों की तरह नहीं जो केवल बात करते हैं। हम वास्तविक रूप से कोशिश कर रहे हैं। हम इस मुद्दे पर चीन के साथ विभिन्न स्तर पर बात कर रहे हैं। 

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पाकिस्तान के साथ कोई छिपा एजेंडा नहीं

हालांकि इस दौरान रूसी डिप्लोमेट ने यह स्वीकार किया कि रूस पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में जुटा हुआ है।  उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद के साथ संबंधों में रूस का कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है। उप विदेश मंत्री रयाबकोव ने कहा कि मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि दुनिया में किसी भी देश के साथ रूस के संबंध भारत के साथ रिश्तों की कीमत पर नहीं बनेंगे।


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चीन कसौटी तय किए जाने के पक्ष में

बता दें कि 48 सदस्यों वाले एनएसजी ग्रुप के विस्तार के लिए चीन चाहता है कि इसके लिए एक कसौटी तय की जाए। एनएसजी समूह में सदस्या के लिए मेरिट के आधार पर किसी भी नए देश को सदस्यता दी जाए। असल में एनएसजी ग्रुप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु व्यापार को नियंत्रित करती है. भारत अपनी दावेदारी के मुकाबले चीन के इस विरोध को पाकिस्तान के पक्ष में मानता है।  चीन भारत को मेरिट के आधार पर एनएसजी की सदस्यता देने का विरोध कर रहा है।

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चीन को समझाने की जिम्मेदारी रूस की

इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने एक बयान में कहा था कि एनएसजी के मुद्दे पर चीन को मनाने के लिए रूस संपर्क किया है। हालांकि मास्को का ऐसा मानना है कि जब तक सभी देश इस बारे में प्रयास नहीं करते हैं, तब तक चीन मानने को तैयार नहीं होगा।

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