Monday, December 17, 2018

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मैसेज भेजकर बैंक-मोबाइल कंपनी उपभोक्ताओं को न डराए, न परेशान करें, उन्हें अंतिम तारीख बताएं - सुप्रीम कोर्ट

अंग्वाल न्यूज डेस्क
मैसेज भेजकर बैंक-मोबाइल कंपनी उपभोक्ताओं को न डराए, न परेशान करें, उन्हें अंतिम तारीख बताएं - सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आधार कार्ड को मोबाइल और बैंक अकाउंट से लिंक करने के मामले में सुनवाई की। सरकार के इस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार करते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने साथ ही सभी बैंकों और मोबाइल कंपनियों से कहा, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने के संदर्भ में ग्राहकों को संदेश भेज-भेज कर न तो डराएं न परेशान करें। इसके लिए जो भी अंतिम तारीख है वो अपने ग्राहकों को बताएं। 

जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की बेंच ने आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा ये बातें कहीं। कोर्ट ने याचिकाओं को पहले से ही मौजूद यचिकाओं के साथ टैग कर दिया और याचिकाकर्ताओं और अन्य पार्टियों से कहा कि वो इस मामले में कोर्ट की संवैधानिक बेंच के सामने अपनी दलीलें रखें। केंद्र सरकार की तरफ से उपस्थित हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि डेटा प्रोटेक्शन बिल के संदर्भ में आधार ऐक्ट में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। 


उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित की गई है जो इस पर काम कर रही है। कोर्ट ने कहा कि जब तक कोर्ट आधार कार्ड से संबंधित याचिकाएं सुन रही है और संवैधानिक बेंच इसके बारे में कोई  फैसला नहीं दे देती, तब तक बैंक और मोबाइल कंपनियां अपने ग्राहकों को यह कहकर ना डराएं कि आधार कार्ड ना लिंक करने पर बैंक अकाउंट या फोन कनेक्शन बंद कर दिए जाएंगे। 

बता दें कि केंद्र सरकार ने एक हलफनामे में कोर्ट को बताया कि प्रिवेन्शन ऑफ मनी लाँड्रिंग एक्ट के तहत बैंक अकाउंट्स को इस साल 31 दिसंबर तक आधार कार्ड से जोड़ना ज़रूरी बताया जा रहा है, लकिन इस तारीख को अगले साल की 31 मार्च तक बढ़ा दिया गया है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि नए अकाउंट खोलने के लिए आधार कार्ड पहचान के तौर पर आधार कार्ड देना अनिवार्य होगा और इसकी तारीख भी 31 मार्च कर दी गई है। 

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