Friday, June 22, 2018

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मोदी से घबराए अखिलेश यादव ने मायावती के आगे डाले 'हथियार', कर दिया ये बड़ा ऐलान

अंग्वाल न्यूज डेस्क
मोदी से घबराए अखिलेश यादव ने मायावती के आगे डाले

लखनऊ । भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार को आगामी लोकसभा चुनावों में चित्त करने के लिए विपक्षी दल रोज नई रणनीति बना रहे हैं। जहां बसपा ने धुरविरोधी सपा के साथ दोस्ती कर ली, वहीं पार्टी में विरोध के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष ने रोजा इफ्तार पार्टाी का आयोजन किया है। इस सब के बीच यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र की मोदी सरकार को मात देने के लिए अपनी नई रणनीति बनाई है। अखिलेश ने ऐलान किया है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में बसपा के साथ गठबंधन बनाए रखने के लिए अगर उन्हें कुछ सीटों का त्याग भी करना पड़ा तो वह इससे पीछे नहीं हटेंगे। यानी अगर सपा-बसपा अपना गठबंधन लोकसभा चुनावों में भी जारी रखते हैं तो बसपा यूपी में सपा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 

मायावती का दबाव काम आया

असल में, पिछले विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाले अखिलेश यादव को केंद्र में मोदी के आने के बाद से राज्य में अपना अस्तित्व खतरे में  नजर आ रहा है। इस बार के विधानसभा चुनावों में पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है। हालांकि पिछले कुछ चुनावों में केंद्र की मोदी सरकार को हराने के लिए सपा-बसपा ने अपनी कटवाहट दूर करते हुए गठबंधन किया और कुछ हद तक भाजपा को नुकसान भी पहुंचाया। अब इस सब के बीच हार में संपन्न हुए उपचुनावों के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने साफ कर दिया था कि अगर उन्हें आगामी चुनावों में सम्मान जनक सीटें नहीं मिलीं तो वह गठबंधन से दूर हो जाएगी। इस बयान से मायावती द्वारा बनाया गया दबाव आखिरकार काम कर गया और सपा प्रमुख आगामी चुनावों में बसपा की जूनियर पार्टी बनने को तैयार हो गई है।

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अखिलेश ने डाले हथियार 

बता दें कि रविवार को मैनपुरी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मैनपुरी में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा- केंद्र की मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए महागठबंधन को मजबूत होना होगा। इस गठबंधन में वह बसपा प्रमुख मायावती के सामने 'हथियार डालते दिखे। उन्होंने कहा कि गठबंधन के लिए हम त्याग करने को तैयार हैं। सूबे में बसपा के साथ हुए गठबंधन को जारी रखने के लिए अगर हमें दो चार सीटें कम पर भी आपसी तालमेल और समझौता करना पड़े तो हम इस पूरी कवायत से पीछे नहीं हटने वाले। 


यूपी में सपा बनेगी बसपा की जूनियर पार्टी

अब राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि सपा ने यूपी में खुद को बहुजन समाज पार्टी के छोटे पार्टनर के रूप में राजनीति करने का मन बना लिया है। पिछले दिनों उपचुनावों में बसपा के साथ गठबंधन से उन्हें जो लाभ मिला, उसे बरकरार रखने के लिए अब सपा अध्यक्ष ने सीट बंटवारे में कम सीटों के बावजूद समझौता बरकरार रखने की बात कही है। अपने बयान से अखिलेश ने मायावती और उनकी पार्टी को अपने से बड़ा मान लिया है।

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सूबे की राजनीति का गणित

बता दें कि यूपी की 80 लोकसभा सीटों पर पिछली बार इस कदर मोदी लहर छाई हुई थी कि 73 सीटों पर भगवा रंग फैल गया था। उस दौरान सपा परिवार के 5 लोग अपनी सीट बचा पाए थे वहीं कांग्रेस को मात्र 2 सीटें मिली थीं। आलम ये था कि लोकसभा में बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। उसके बाद पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में जनता ने योगी की सरकार बनाकर एक बार फिर भाजपा को जोरदार समर्थन दिया। क्षेत्र के सियासी समीकरण पिछले दिनों फूलपुर और गोरखपुर उपचुनावों में सपा-बसपा गठबंधन के बाद भाजपा को मिली करारी हार के बाद से बदले। इसके बाद अन्य उपचुनावों में भी इस गठबंधन ने भाजपा को धूल चटाई है। ऐसे में यह गठबंधन आने वाले लोकसभा चुनावों में भी भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। 

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