Sunday, September 23, 2018

Breaking News

   ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पूर्व जीएम के ठिकानों पर आयकर के छापे     ||   बिहार: पूर्व मंत्री मदन मोहन झा बनाए गए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष। सांसद अखिलेश सिंह बनाए गए अभियान समिति के अध्यक्ष। कौकब कादिरी समेत चार बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष।     ||   कर्नाटक के मंत्री शिवकुमार के खिलाफ ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया    ||   सीतापुर में श्रद्धालुओें से भरी बस खाई में पलटी 26 घायल, 5 की हालत गंभीर     ||   मंगल ग्रह पर आशियाना बनाएगा इंसान, वैज्ञानिकों को मिली पानी की सबसे बड़ी झील     ||   भाजपा नेता का अटपटा ज्ञान, 'मृत्युशैया पर हुमायूं ने बाबर से कहा था, गायों का सम्मान करो'     ||   आज से एक हुए IDEA-वोडाफोन! अब बनेगी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी     ||   गोवा में बड़ी संख्‍या में लोग बीफ खाते हैं, आप उन्‍हें नहीं रोक सकते: बीजेपी विधायक     ||   चीन फिर चल रहा 'चाल', डोकलाम में चुपचाप फिर शुरू कीं गतिविधियां : अमेरिकी अधिकारी     ||   नीरव मोदी, चोकसी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 25-26 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश     ||

नवजोत सिंह सिद्धू को मिलेगी जेल या राहत, 30 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला

अंग्वाल न्यूज डेस्क
नवजोत सिंह सिद्धू को मिलेगी जेल या राहत, 30 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला

नई दिल्ली। भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम चुके फायरब्रांड नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सिद्धू के खिलाफ 30 साल पुराने  रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। बता दें कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिद्धू को इस मामले मंे 3 वर्ष कैद की सजा सुनाई थी जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। यहां बता दें कि 18 अप्रैल को जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने 1988 के रोड रेज मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

गौरतलब है कि नवजोत सिंह सिद्धू की तरफ से पेश हुए वकील आरएस चीमा ने पीठ के समक्ष कहा था कि हाईकोर्ट का आदेश मेडिकल साक्ष्यों पर नहीं बल्कि अनुमान पर आधारित था और इस तरह के अनुमान का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा था कि गुरनाम सिंह ही मौत के सही कारणों का पता नहीं चल पाया था। बता दें कि ट्रायल कोर्ट के सामने सिद्धू के वकील ने कहा कि सभी गवाहों ने अलग-अलग बयान दिए हैं। 

ये भी पढ़ें - मोदी मंत्रिमंडल में हुआ बड़ा फेरबदल, पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त भार, राठौर को स्...


यहां बता दें कि गुरनाम सिंह का मौत की जांच कर रहे 6 सदस्यीय चिकित्सा विशेषज्ञों को उसकी मौत पर अपनी राय देने के लिए कहा गया था लेकिन उनमें से कुछ से पूछताछ भी नहीं की गई।  मेडिकल साक्ष्यों में कमी और अभियोजन पक्ष के गवाहों ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष अलग बयान दिए थे। वहीं, पंजाब सरकार ने कोर्ट में कहा था कि 30 साल पुराने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सिद्धू को दोषी ठहराए जाने का फैसला सही है। 

गौर करने वाली बात है कि अगर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सिद्धू की सजा पर मुहर लगा दी जाती है तो सजा खत्म होने के बाद वे 6 सालों के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य हो जाएंगे। सिद्धू पर आरोप था कि 27 दिसंबर, 1988 को पटियाला में सड़क पर 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से बहस हो गई थी और गुस्से में सिद्धू ने उन्हें मुक्का मार दिया था जिससे अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। 

हालांकि निचली अदालत ने सिद्धू को आरोप मुक्त कर दिया था लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार करते हुए सिद्धू को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई थी।

Todays Beets: