Saturday, March 23, 2019

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चीन ने भारत में कई क्षेत्रों में जताई निवेश की इच्छा, दोनों देशों के व्यापारिक संबंध होंगे और मजबूत

अंग्वाल न्यूज डेस्क
चीन ने भारत में कई क्षेत्रों में जताई निवेश की इच्छा, दोनों देशों के व्यापारिक संबंध होंगे और मजबूत

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध अब और मजबूत होंगे। बुधवार को दोनों देशों के बीच तीसरा इंडो-चाइना टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर कांफ्रेंस दिल्ली में संपन्न हुआ। इस कां्रफ्रेंस में भारत और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों मंे निवेश को लेकर हस्ताक्षर किए गए। इस खास कांफ्रेंस में चीन की 50 कंपनियों ने हिस्सा लिया। कांफ्रेंस के पहले दिन चीन और भारत के कंपनियों ने अपने प्रेजेंटेशन दिए एवं दूसरे दिन बी-2बी मींटिग किए एवं तकनीकी और निवेश पर हस्ताक्षर किए गए हैं। भारत की ओर से सोलर एनर्जी के क्षेत्र मंे चीन से बड़े निवेश की उम्मीद की जा रही है। 

गौरतलब है कि आईसीटीसी के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने कहा कि चाइना की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए आई हैं जिसे सरकार की ओर से सहायता की जरूरत है। इस मौके पर  इंडो चाइना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के वाइस चेयरमैन वीके मिश्रा ने कहा कि चीन ने भारत में निवेश की कई संभावनाएं को तलाशा है, खास तौर से ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में चीन के निवेश करने से रोजगार बढ़ेगा वहीं इससे  सस्ते सोलर पैनल भी उत्पन्न होंगे। उन्होंने कहा कि चीन भारत में निवेश को उत्सुक है जिसके लिए कई हस्ताक्षर भी हुए हैं। मिश्रा ने कहा कि छोटे व मध्यम उद्योग में चीन के तकनीक से बेहतर उत्पादन एवं रोजगार उत्पन्न होंगे। 

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यहां बता दें कि भारत और चीन के बीच के हुए कांफ्रेंस का थीम भी  ‘‘काॅलेबोरेशन, इनोवेशन एवं निवेश’’ रखा गया था। गौर करने वाली बात है कि एसएमई इंटरप्राइजेज के सचिव डॉ अरुण कुमार पांडा ने कहा कि आज भारत-चीन को मिलकर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आई-सी कांसेप्ट विश्व में एक नया ट्रेंड लाया है। यह ‘आईसी’ इंडो-चाइना है जो विश्व में उद्योग को लीड करने की क्षमता रखता है। वहीं एंबेसी ऑफ पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के मंत्री ली बिजान ने कहा कि चीन भारत के साथ सहयोग कर रहा है। उन्हांेने कहा कि भारत में और बेहतर निवेश की संभावना है। ली बिजान ने कहा कि अगर भारत चीन मिल जाए तो विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का नेतृत्व कर सकता है।

यूनान एकेडमी ऑफ सांयटिफिक एंड टेक्नीकल इंफोरमेशन के डायरेक्टर जनरल मा मिक्सिइयांग ने कहा कि ‘‘यह समिट बिजनेस को बढ़ाने के लिए जरूरी थी। हम तो चाहेंगे कि ऐसे आयोजन चीन में हो जिससे की बेहतर संबंध और व्यापार बढ़ सके। आज निश्चित तौर पर कई समस्या है लेकिन मिलकर बात करने से  इसका हल निकाला जा सकता है। चीन भारत को सहयोगी देश की तरह देखता है।

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इस खास कांफ्रेन्स 2 एमओयू भी हस्ताक्षर किए गए। चीन, भारत में एफएमसीजी, मीडिया, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश को तैयार है। शिक्षा के क्षेत्र में भी निवेश को तैयार है इसके लिए विश्वविद्यालय को चीन आमंत्रित किया है ताकि एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझ सकें। कांफ्रेंस के दौरान चीनी कंपनियों ने अपने स्टाॅल पर कई उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। 

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