Monday, December 17, 2018

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लाखों का पैकेज नहीं भाया मन को, छोड़कर बनी साध्वी, वाराणसी के धर्म संसद में हिस्सा लेने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि

अंग्वाल न्यूज डेस्क
लाखों का पैकेज नहीं भाया मन को, छोड़कर बनी साध्वी, वाराणसी के धर्म संसद में हिस्सा लेने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि

वाराणसी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए वाराणसी में तीन दिनों के धर्म संसद का आयोजन किया गया। इसमें हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में साधु-साध्वी पहुंचे। इस धर्म संसद में भाग लेने वाली एक साध्वी ऐसी भी थी जिसने गूगल जैसी कंपनी में लाखों का पैकेज छोड़कर अध्यात्म की राह अपना ली थी। इस साध्वी का नाम ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद है। बताया जा रहा है कि यह साध्वी धर्म संसद में सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि थी। बता दें कि मंदिर निर्माण को लेकर साधु समाज की ओर से सरकार पर संसद में अध्यादेश लाने का दवाब बनाया जा रहा है लेकिन भाजपाध्यक्ष अमित शाह ने इस बात को साफ कर दिया कि सरकार शीतकालीन सत्र में कोई अध्यादेश नहीं लाने जा रही है। 

गौरतलब है कि इन दिनों अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसके लिए अयोध्या से लेकर वाराणसी तक धर्म सभा और धर्म संसद का आयोजन किया गया है। वाराणसी में आयोजित धर्म संसद में हिस्सा लेने वाली साध्वी ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि थीं। बता दें कि साध्वी ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद साध्वी बनने से पहले सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल मंे लाखों के पैकेज पर काम करती थीं। 

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यहां बता दें कि दिल्ली में पली बढ़ी साध्वी ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद एक बड़े कारोबारी की बेटी हैं। इन्होंने शुरू से ही इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम किया, फिर सीएस की पढ़ाई की। शिक्षा के बल पर ही गूगल जैसी कंपनी में नौकरी लगी। करीब एक साल तक नौकरी की और इस दौरान उन्होंने अपने माता-पिता के साथ मंदिरों और गुरुमाता के यहां आती जाती रहीं हैं।

एक गुरुमाता के द्वारा ईश्वर को लेकर बताए गए मार्ग से वह इतना प्रभावित हुईं कि उन्हांेने लाखों का पैकेज छोड़कर वैराग्य अपनाने का फैसला ले लिया। शुरुआत में पिता ने इसका विरोध किया लेकिन उनकी इच्छा के आगे उन्हें झुकना पड़ा। इसके बाद मैं गुरु माता आशुतोशांवरी की शरण में गोरखपुर के मुंडेरवा स्थित परब्रह्म संयोज्य शरणमेमि आश्रम आ गई। वहां उनका नाम ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद पड़ा। 

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