Monday, November 20, 2017

Breaking News

   मैदान पर विराट के आक्रामक रवैये पर राहुल द्रविड़ को सताई चिंता     ||   अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित नहीं करेगा चीन, प्रस्ताव पर रोक लगाने के संकेत     ||   दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बनाकर चीन अब ब्रह्मपुुत्र नदी का पानी रोकने का बना रहा है प्लान     ||   पीएम मोदी को शीला दीक्षित ने दिया जवाब- हमने नहीं भुलाया पटेल का योगदान    ||   पटना पहुंचे मोहन भागवत, यज्ञ में भाग लेने जाएंगे आरा, नीतीश भी जाएंगे    ||   अखिलेश को आया चाचा शिवपाल का फोन, कहा- आप अध्यक्ष हैं आपको बधाई    ||   अमेरिका में सभी श्रेणियों में H-1B वीजा के लिए आवश्यक कार्रवाई बहाल    ||   रोहिंग्या पर किया वीडियो पोस्ट, म्यांमार की ब्यूटी क्वीन का ताज छिना    ||   अब गेस्ट टीचरों को लेकर CM केजरीवाल और LG में ठनी    ||   केरल में अमित शाह के बाद योगी की पदयात्रा, राजनीतिक हत्याओं पर लेफ्ट को घेरने की रणनीति    ||

पंचकुला में डेरा सर्मथकों की हिंसा पर इस लेड़ी IAS पुलिस के आदेश से पाया गया था काबू 

अंग्वाल संवाददाता
पंचकुला में डेरा सर्मथकों की हिंसा पर इस लेड़ी IAS पुलिस के आदेश से पाया गया था काबू 

नई दिल्ली। साध्वी से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार राम रहीम पर फैसला आते ही करीब डेढ लाख डेरा समर्थक पंचकूला में हिंसा पर उतारू हो गए थे। तैनात पुलिसकर्मी स्थानीय घटना पर काबू न पाने पर वहां से पीठ दिखाकर भाग खड़े हुए थे। परन्तु वहीं मौजूद एक महिला आईएएस अधिकारी ने पंचकूला को जलने और तबाह होने से बचा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ये महिला आईएएस हैं गौरी पराशर जोशी , जो पंचकूला में उपायुक्त हैं। पंचकूला में जब हिंसा शुरू हुई तो पुलिस ने समर्थकों का गुस्सा देख पीछे हटना शुरू कर दिया था। ऐसे में गौरी पराशर जोशी ने मोर्चा संभाला और खुद आगे आई। इस महिला अधिकारी ने आंदोलनकारियों को शांत करने की कोशिश की। 

यह भी पढ़े- बलात्कारी राम रहीम को 10 साल की जेल, सजा सुनकर जज के सामने जोर-जोर से रोया बाबा

 इस दौरान 11 महीने के एक बच्चे को मां गौरी चोटिल हो गई थी, उनके पकड़े थी फट गए थे। पुलिस ने इस महिला अधिकारी को एक पीएसओ के भरोसे अकेले छोड़ दिया था। लेकिन इस स्थिति के बावजूद गौरी अपने ऑफिस गई और स्थिति को संभालने के लिए सेना के अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद सेना ने कार्रवाई की और स्थिति में सुधार आया। 


यह भी पढ़े- भारत को युद्ध की धमकियां देने वाला चीन डोकलाम से हटाएगा अपनी सेनाएं, भारत की बड़ी कूटनीति जीत

बता दें कि अगर समय रहते सेना को न बुलाया गया होता तो आंदोलनकारी हिंसक भीड़ पंचकुला के रिहायशी इलाकों में घुस जाते। ऐसी स्थिति में वह आवासीय क्षेत्र में भी हिंसा कर सकते थे और आगजनी जैसी वारदातों को अंजाम दे सकते थे। इस पूरे मामले में स्थानीय निवासियों का कहना है कि डेरा समर्थक जब हिंसा पर ऊतर आए तो सबसे पहले स्थानीय पुलिस वहां से भाग गई।

बहरहाल, गौरी पराशर जोशी इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद सुबह 3 बजे घर पहुंची। इससे पहले उन्होंने शहर के हर इलाके में जाकर खुद को आश्वस्त किया कि हिंसा पक पूरी तरह नियंत्रण कर लिया गया है। 

Todays Beets: