Monday, December 17, 2018

Breaking News

   कुशल भ्रष्टाचार और अक्षम प्रशासन का मॉडल है कांग्रेस-कम्युन‍िस्ट सरकार-PM मोदी     ||   CBI: राकेश अस्थाना केस में द‍िल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई 20 द‍िसंबर तक टली     ||   बैडम‍िंटन खि‍लाड़ी साइना नेहवाल ने पी कश्यप से की शादी     ||   गुलाम नबी आजाद ने जीवन भर कांग्रेस की गुलामी की है: ओवैसी     ||   बाबा रामदेव रांची में खोलेंगे आचार्यकुलम, क्लास 1 से क्लास 4 तक मिलेगी शिक्षा     ||   मैंने महिलाओं व अन्य वर्गों के लिए काम किया, मेरा काम बोलेगा: वसुंधरा राजे     ||   बजरंगबली पर दिए गए बयान को लेकर हिन्दू महासभा ने योगी को कानूनी नोटिस भेजा     ||   पीएम मोदी 3 द‍िसंबर को हैदराबाद में लेंगे पब्ल‍िक मीट‍िंग     ||   भगत स‍िंह आतंकवादी नहीं, हमारे देश को उन पर गर्व है- फारुख अब्दुल्ला     ||   अन‍िल अंबानी की जेब में देश का पैसा जा रहा है-राहुल गांधी     ||

बिहार में कुशवाहा और शरद हो सकते हैं एक, मुलाकात के बाद राजनीतिक कयास तेज 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बिहार में कुशवाहा और शरद हो सकते हैं एक, मुलाकात के बाद राजनीतिक कयास तेज 

पटना। बिहार में राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सीटों के बंटवारे पर खुद को असहज महसूस करने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) उससे अलग हो सकती है। अगर ऐसा होता है और पार्टी के मुखिया और केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा इस्तीफा दे देते हैं तो शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल का विलय रालोसपा में हो सकता है। कुशवाहा और शरद यादव की मुलाकात के बाद इस बात के कयास तेज हो गए हैं। 

गौरतलब है कि उपेन्द्र कुशवाहा बिहार में सम्मानजनक सीटों की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी वहां सीटों के बंटवारे पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। अब कुशवाहा ने इसके मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी से 28 नवंबर से 30 नवंबर के बीच मिलने का समय मांगा है।  

ये भी पढ़ें - आयकर विभाग ने Pan Card से संबंधित दो नियम बदले , 5 दिसंबर से लागू होंगे नए नियम


यहां बता दें कि शरद यादव आगामी लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए के खिलाफ बिहार में कांग्रेस, जनता दल, रालोसपा, हम और लेफ्ट पार्टियों के साथ मिलकर महागठबंधन बनाना चाहते हैं। राजग से नाराजगी के बीच बीते दिनों शरद और कुशवाहा की मुलाकात में महागठबंधन पर चर्चा के दौरान दोनों दलों के विलय पर भी गंभीर मंथन हुआ। इस मामले में शरद का रुख बेहद सकारात्मक था।   

ऐसा माना जा रहा है कि उपेन्द्र कुशवाहा की राजग में मौजूदगी बस औपचारिकता भर है। वे चाहते हैं कि उन्हें गठबंधन से अलग कर दिया जाए। यही वजह है कि वह विपक्षी पार्टियों के नेताओं से मिल रहे हैं और दूसरी तरफ पीएम से मिलने का वक्त भी मांग रहे हैं।     

Todays Beets: