Friday, June 22, 2018

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एक बार फिर बिहार बोर्ड पर उठे सवालिया निशान, टॉपर कल्पना कुमारी को लेकर विवाद

अंग्वाल न्यूज डेस्क
एक बार फिर बिहार बोर्ड पर उठे सवालिया निशान, टॉपर कल्पना कुमारी को लेकर विवाद

पटना। एक बार फिर बिहार बोर्ड सुर्खियों में है। बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर से सवालिया निशान उठ खड़े हुए हैं। बिहार बोर्ड की 12वीं की टॉपर कल्पना कुमारी के बिहार बोर्ड के विज्ञान संकाय में टॉप करने की घोषणा के तुरंत बाद ही एक बड़ा विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने अपनी इज्जत बचाने के लिए झूठ का सहारा लिया। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब बिहार बोर्ड को लेकर सवाल उठ रहे हों। इससे पहले भी बोर्ड की 12वीं कक्षा के टॉपर को लेकर भारी घालमेल सामने आया था, जिसमें टॉपरों को अपने विषय के नाम तक बता नहीं थे, तो पिछले साल टॉप करने वाले गणेश कुमार अपना नाम और जन्मतिथि गलत अंकित कराने के चलते विवादों में आया था।

इस साल क्या है मामला

इस साल एक बार फिर से बिहार की शिक्षा व्यवस्था और बिहार बोर्ड की प्रासंगिकता को लेकर सवाल ख़े हुए हैं। 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा में न्यूनतम उपस्थिति होना अनिवार्य है। कई जगहों पर तो छात्रों के लिए न्यूनतम उपस्थिति 75 फीसदी है, पर बिहार बोर्ड की टॉपर कल्पना कुमारी जो विज्ञान संकाय की टॉपर बनीं हैं, उसने कभी स्कूल में क्लास का मुंह तक नहीं देखा। दरअसल, पिछले हफ्ते NEET  की परीक्षा में टॉप करने के बाद कल्पना ने इंटरव्यू में बताया की वह पिछले 2 साल से दिल्ली के आकाश इंस्टियूट से मेडिकल की तैयारी कर रही थी। इस दौरान कल्पना ने बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा देने के लिए गृह जिले शिवहर के तरियानी में स्थित वाईकेजेएम कॉलेज में दखिला लिया हुआ था।

बिहार बोर्ड पर उठे सवाल


इसके बाद बिहार बोर्ड से सवाल किए गए कि जब किसी छात्र की उपस्थिति न के बराबर थी तो फिर ऐसे में छात्र को बिहार बोर्ड की परीक्षा मे बैठने की अनुमति कैसे दी गई। विवाद को बढ़ता देख कर बिहार स्कूल परीक्षा के चेयरमैन आनंद किशोर ने झूठ बोल कर विवाद को खत्म करने की कोशिश की। आनंद किशोर इस बात का ऐलान कर रहे हैं कि बिहार के स्कूलों में उपस्थिति का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार के सरकारी स्कूलों में छात्र स्कूल आए न आए पर परीक्षा नें बैठ कर टॉप कर सकते हैं।

फर्जी छात्रा नहीं है कल्पना

हालांकि इस दौरान यह बात तो साफ हो गई है कि कल्पना कुमारी कोई फर्जी छात्र तो नहीं हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन और बिहार बोर्ड के इस मामले पर पर्दा डालने के लिए दिए जा रहे तर्कों से एक बार फिर से बोर्ड का परिणाम और बिहार की शिक्षा व्यवस्था बदनामी का दंश झेलने को मजबूर हुई है।

 

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