Friday, November 24, 2017

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नौजवानों को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करेगी सरकार, कुमाऊं-गढ़वाल मंडलों में खुलेंगे प्रशिक्षण केन्द्र 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
नौजवानों को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करेगी सरकार, कुमाऊं-गढ़वाल मंडलों में खुलेंगे प्रशिक्षण केन्द्र 

देहरादून। राज्य सरकार नौजवानों को सेना और अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए प्रेरित करने की पूरी कोशिश कर रही है। इसके लिए कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों में प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने आवास पर सेना के बंगुलरु सिलेक्शन सेंटर के कमांडेंट मेजर जनरल वीपीएस भाकुनी से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी है। सेना के कमांडेंट का कहना है कि इन दिनों एनडीए और सीडीएस का परिणाम सिविल सेवा से भी कम है। सैनिक कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग से समन्वय कर प्रशिक्षण कार्यशालाओं हेतु स्थायी केन्द्र के रूप में स्कूल या काॅलेज के भवन चयनित करेंगे जहां नियमित पठन-पाठन के साथ-साथ कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा सके।

कैसे भर्ती हों सेना में

गौरतलब है कि सेना में ज्यादा से ज्यादा नौजवान भर्ती हों इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। मेजर जनरल भाकुनी का कहना है कि सिविल सेवाओं के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना अधिक अभ्यर्थी एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं में आवेदन करते हैं लेकिन सेना में भर्ती के लिए जरूरी सभी जरूरतों को पूरा नहीं करने की वजह से सफलता की दर कम होती है। सेना में अधिकारी के पदों पर उनके चयन के लिए उन्हें पहले से तैयार किया जाने के लिए यह कदम उठाए जाने की जरूरत है। दोनों मंडलों में प्रशिक्षण केन्द्र खुलने से युवाओं के पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और साक्षात्कार में पेश होने के तरीके के बारे में पता चलेगा। 

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सैनिक स्कूल खोलने की तैयारी

राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड हमेशा से वीरों की भूमि रही है यहां के युवाओं में सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। ऐसे में प्रशिक्षण केन्द्र खोलकर उनके सफल होने के मौके को बढ़ाया जा सकता है। इस केन्द्र में सिर्फ सैन्य सेवा ही नहीं बल्कि अन्य सरकारी नौकरियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रथम चरण में कुमाऊं और गढ़वाल में प्रशिक्षण कार्याशालाएं(ट्रेनिंग वर्कशाॅप) ऐसे स्कूल-काॅलेज के भवनों में संचालित होगी जहां पर्याप्त अवस्थापना सुविधाएं होंगी। वहीं दूसरे चरण में 11वीं-12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए राज्य सरकार द्वारा स्थायी मिलिट्री/सैनिक स्कूल खोलने पर भी विचार किया जा सकता है।

 

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