Friday, July 21, 2017

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उत्तराखंड मेें बादल फटने से बढ़ी आफत, अल्मोडा में गांव मल्‍ला गजार के लोग बने 'बंधक', प्रशासन से मदद की गुहार

अंग्वाल न्यूज डेस्क
उत्तराखंड मेें बादल फटने से बढ़ी आफत, अल्मोडा में गांव मल्‍ला गजार के लोग बने

अल्मोड़ा। राज्य में मौसम के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। प्रदेश के कई हिस्सों से बादल फटने की खबरें आ रहीं हैं। बीते दिनों अल्मोड़ा की चौखुटिया तहसील के खजुरानी के गांव मल्‍ला गजारमें बादल फटने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी के तेज बहाव में सड़क के बह जाने से लोगों की आवाजाही का मार्ग भी बंद हो गया है। प्रशासन की ओर से भी लोगों को मदद देने में लापरवाही बरती जा रही है। बादल फटने के बाद सड़क संपर्क टूटने से बच्चों और मरीजों को उनकी मंजिलों तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण खुद को बंधक बना हुआ मान रहे हैं। वहीं, राज्य में लगातार हो रही भारी बारिश से कई अन्य जिलों में भी जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।

 

खजुरानी के ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

बता दें कि गत 10 जुलाई को बादल फटने से तहसील चौखुटिया के अंतर्गत ग्राम पंचायत खजुरानी के गांव मल्‍ला गजार का संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट गया है। वही दूसरे रास्तों पर भी मौसम की मार पड़ी है, जिसके चलते वहां से आवाजाही बंद हो गई है। इससे वहां के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हालात में प्रशासन ने केवल दो तीन पीड़ित परिवारों को टेंट वितरण किए हैं, जो पर्याप्त नहीं है। जबतक आवजाही नहीं होगी बच्‍चे स्‍कूल नहीं जा पाएंगे और न मरीजों को चिकित्‍सा का लाभ मिल पाएगा। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब प्रशासन की टीम पांच दिन बाद जिला चमोली ( गढ़वाल ) के रास्‍ते घटनास्‍थल पर मल्‍ला गजार पहुंच पाई। ऐसे में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक खत लिखकर आपदा प्रबंधन टीम को वहां के हालात देखने के लिए कहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आवाजाही बंद होने से वह बंधक से बन गए हैं। ऐसे में जरूरत है टूटे रास्ते को जल्द से जल्द बनवाया जाए। 

कई जिलों में बंद पड़े हैं रास्ते

गौरतलब है कि उत्तराखंड में मानसून की शुरुआत में ही भयंकर बारिश हो रही है। इससे गंगा समेत यहां बहने वाली सभी नदियों के जलस्तर में काफी वृद्धि हो गई है।  मौसम के तल्ख मिजाज का सामना  लोगों और कांवड़ यात्रियों को करना पड़ रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन के चलते जोशीमठ में पहाड़ टूटकर गिरने से कांवड़ियों को आगे जाने से रोक दिया गया है। पिथौरागढ़ जिले में जौलजीवी-मुनस्यारी मार्ग करीब 10 घंटों से बंद पड़ा रहा। वहीं सेराघाट-नैनी मोटर मार्ग करीब एक सप्ताह से बंद पड़ा है। बारिश के कारण बागेश्वर जिले में बागेश्वर कपकोट मोटर मार्ग पर भी आवाजाही प्रभावित हो रही है। 

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प्रशासन पर भेदभाव का आरोप

आपको बता दें कि बाढ़ जैसे हालात से निपटने के लिए प्रशासन की तरफ से मदद  तो दी जा रही है लेकिन उसमें भी भेदभाव किया जा रहा है। प्रशासन ने सिर्फ दो-तीन परिवारों को ही टेंट मुहैया कराए हैं। अल्मोड़ा की चौखुटिया तहसील में रहने वाले लोगों की परेशानी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रशासन को वहां पहुंचने में पांच दिनों का समय लग गया। अब इस इलाके के लोगों की सरकार से यही मांग है कि जल्द से जल्द रास्ता तैयार कराया जाए ताकि लोगों की परेशानियां कम हो सके।

 

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