Thursday, September 20, 2018

Breaking News

   ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पूर्व जीएम के ठिकानों पर आयकर के छापे     ||   बिहार: पूर्व मंत्री मदन मोहन झा बनाए गए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष। सांसद अखिलेश सिंह बनाए गए अभियान समिति के अध्यक्ष। कौकब कादिरी समेत चार बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष।     ||   कर्नाटक के मंत्री शिवकुमार के खिलाफ ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया    ||   सीतापुर में श्रद्धालुओें से भरी बस खाई में पलटी 26 घायल, 5 की हालत गंभीर     ||   मंगल ग्रह पर आशियाना बनाएगा इंसान, वैज्ञानिकों को मिली पानी की सबसे बड़ी झील     ||   भाजपा नेता का अटपटा ज्ञान, 'मृत्युशैया पर हुमायूं ने बाबर से कहा था, गायों का सम्मान करो'     ||   आज से एक हुए IDEA-वोडाफोन! अब बनेगी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी     ||   गोवा में बड़ी संख्‍या में लोग बीफ खाते हैं, आप उन्‍हें नहीं रोक सकते: बीजेपी विधायक     ||   चीन फिर चल रहा 'चाल', डोकलाम में चुपचाप फिर शुरू कीं गतिविधियां : अमेरिकी अधिकारी     ||   नीरव मोदी, चोकसी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 25-26 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश     ||

सालों से आपदा की मार झेल रहे पिथौरागढ़ के इन गांवों का ‘अस्तित्व’ हो सकता है खत्म, पहाड़ों पर पड़ी दरारें

अंग्वाल न्यूज डेस्क
सालों से आपदा की मार झेल रहे पिथौरागढ़ के इन गांवों का ‘अस्तित्व’ हो सकता है खत्म, पहाड़ों पर पड़ी दरारें

पिथौरागढ़। उत्तराखंड में पिथौरागढ़ इलाके के पैंकुति और दारी गांवों में 2004 में आई आपदा के दौरान भीषण तबाही मची थी। अब इस गांव के ऊपर पहाड़ी पर करीब 10 दरारें पड़ गई हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अगर भारी बारिश के दौरान पहाड़ी दरकती है तो दोनों गांवों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। बताया जा रहा है कि इस महीने की शुरुआत में हुई भारी बारिश के बाद गावों के कई मकानों में भी दरारें आ गई हैं। इन दोनों गांवों के करीब 40 परिवार दहशत में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। 

गौरतलब है कि तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पापड़ी ग्राम पंचायत के दारी और पैंकुति तोक निवासी साल 2004 से ही अपने पुनर्वास की राह देख रहे हैं लेकिन अब तक इनकी कोई खोज खबर नहीं ली गई है। साल  2013 में आई आपदा ने भी इन गांवों में भारी तबाही मचाई थी। इन गांवों के निवासी आज भी अपनी रातें दहशत में गुजारने पर मजबूर हैं। 

ये भी पढ़ें - नहीं रहीं उत्तराखंड की पहली लोकगायिका कबूतरी देवी, 73 साल की उम्र में हुआ निधन


यहां बता दें कि राज्य में हो रही लगातार भारी बारिश की वजह से पैंकुति गांव के वीरेंद्र सिंह बिष्ट के मकान में दरारें आ गईं है जबकि गोमती देवी के मकान को भी नुकसान पहुंचा है। दारी गांव के मंगल सिंह के आंगन में दरारें पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को ग्रामीणों को विस्थापित करने में देर नहीं करनी चाहिए। दोनों गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर नहीं बसाया गया तो मामला गंभीर हो सकता है। गांव वाले सरकार पर आरोप लगाते हुए कह रहे हैं कि दोनांे गांव साल 2004 से आपदा की मार झेल रहे हैं लेकिन किसी को यहां के लोगों के विस्थापन की कोई फिक्र नहीं है। अब मुनस्यारी के एसडीएम कृष्ण नाथ गोस्वामी का कहना है कि दारी और पैंकुति गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया जाएगा। सर्वेक्षण के बाद ही पुनर्वास के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। 

 

Todays Beets: