Thursday, January 17, 2019

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प्रदेश के शिक्षा विभाग में बड़े बदलाव की तैयारी, 126 कार्यालय हो सकते हैं बंद

अंग्वाल न्यूज डेस्क
प्रदेश के शिक्षा विभाग में बड़े बदलाव की तैयारी, 126 कार्यालय हो सकते हैं बंद

देहरादून। राज्य के शिक्षा विभाग ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। सरकार ने विभाग के कई अनुपयुक्त दफ्तरों, स्कूलों के विलय और शिक्षकों एवं अधिकारियों की कटौती के विभागीय एकीकरण का प्रस्ताव मांगा है। बता दें कि इससे पहले भी सरकार ने प्राईवेट स्कूलों के लिए फीस एक्ट लागू करने का काम किया है। बता दें कि शिक्षा विभाग के बेकार पड़े कार्यालयों को बंद करने की कार्रवाई वित्त विभाग की रिपोर्ट के बाद की गई है। 

गौरतलब है कि वित्त विभाग की रिपोर्ट में ब्लॉक से राज्यस्तर तक के 126 दफ्तरों को बंद करने लायक माना गया है। आपको बता दें कि इन दफ्तरों के बंद होने से बड़ी संख्या में अधिकारी भी कम हो जाएंगे। इसके साथ ही कम छात्रों वाले स्कूलों के दूसरे स्कूलों में विलय होने और करीब 400 इंटर काॅलेजों के बंद होने से सरकार पर खर्च का भी बोझ कम होगा। गौर करने वाली बात है कि राज्य में बड़ी संख्या में ब्लाॅक और जिला स्तर पर एक ही चीज के 2 कार्यालय बना दिए गए हैं। इससे सरकारी खर्च बढ़ रहा है। 

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यहां बता दें कि वित्त विभाग की रिपोर्ट के बाद इन अनुपयुक्त कार्यालयों के बंद करने के लिए फिलहाल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बात की जा रही है। सभी निदेशालय अनुपयोगी दफ्तरों को समाप्त करने के मुद्दे पर काफी समय से मंथन कर रहे हैं। जल्द ही एक संयुक्त प्रस्ताव सरकार को दे दिया जाएगा।

वित्त विभाग की सिफारिश


123 दफ्तर बंद करने लायक- ब्लॉक में बीईओ व उपशिक्षा अधिकारी के दो कार्यालय हैं। जिलास्तर पर सीईओ, डीईओ-बेसिक, डीईओ-माध्यमिक के तीन दफ्तर हैं। मंडल स्तर पर एडी बेसिक और एडी माध्यमिक के दो दफ्तर हैं। राज्य स्तर पर बेसिक व माध्यमिक के 2 निदेशक हैं। ब्लॉक, जिला मंडल व राज्यस्तर पर एक-एक पद रखने की सिफारिश की गई है।

राज्यस्तरीय कार्यालय भंग हों-  वित्त विभाग ने निदेशक अनुसंधान एवं शोध कार्यालय और राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण (सीमेट) के साथ विद्यालयी शिक्षा बोर्ड-रामनगर को भी भंग करने की सिफारिश की है। वित्त विभाग ने इन तीनों को अनुपयोगी माना है।

1898 करोड़ रुपये बचेंगे- अशासकीय स्कूलों के 488 करोड़ के अनुदान व 400 इंटर कॉलेज बंद करके 1196 करोड़ रुपये बचेंगे। जूनियर और हाईस्कूल एकीकरण से  662 करोड़ और वरिष्ठ अफसरों के पद घटाने से 50 करोड़ रुपये का बोझ कम होगा।

 

  

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