Friday, October 20, 2017

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बाजार से 500 करोड़ का ऋण लेकर सरकार कर्मचारियों का घर कर रही रोशन, राजस्व पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बाजार से 500 करोड़ का ऋण लेकर सरकार कर्मचारियों का घर कर रही रोशन, राजस्व पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ

देहरादून। राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को दिवाली का गिफ्ट देकर भले ही जनता की सहानुभूति बटोर रही है लेकिन इससे उसकी माली हालत और ज्यादा खराब हो गई है। कर्मचारियों को बोनस और सातवें वेतनमान का फायदा देने के लिए सरकार को बाजार से 500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। अब तक सरकार बाजार से 2700 करोड़ का कर्ज उठा चुकी है।

वेतन पर खर्च हो रहा बजट का हिस्सा

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार पहले भी जनता को फायदा पहुंचाने के लिए कर्ज लेना पड़ा है। सरकार भले ही जनता पर मेहरबान नजर आ रही है लेकिन उसकी यह मेहरबानी काफी महंगी साबित हो रही है। एक महीने के अंदर सरकार को दो बार कर्ज लेना पड़ा। पिछले महीने ही सरकार ने 400 करोड़ और 500 करोड़ का ऋण लिया था। अब इस महीने भी ऐसी ही नौबत नजर आ रही है। राज्य के कुल बजट का करीब 83 फीसदी हिस्सा सिर्फ कर्मचारियों को वेतन और भत्ता देने पर ही खर्च हो रहा है।

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कर्ज का बोझ 

आपको बता दें कि राज्य सरकार सातवें वेतनमान का लाभ अब निगमों-उपक्रमों को भी देने जा रही है जबकि बीते दिन मंत्रिमंडल ने राज्य की जिला पंचायतों और निकायों को भी सातवां वेतन देने के फैसले पर मुहर लगा दी है। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है। वित्तीय बोझ को पूरा  करने के लिए सरकार को बाजार से ऋण लेना पड़ रहा है। बता दें कि राज्य में इतने संसाधन नहीं हैं जिसके बल पर राज्य सरकार अपने सभी खर्च पूरे कर सके। गौर करने वाली बात है कि रिजर्व बैंक ने राज्य के लिए चालू वित्तीय वर्ष में कर्ज की सीमा 5850 करोड़ से बढ़ाकर 6422 करोड़ कर दी है। इससे सरकार को थोड़ी राहत तो मिली है लेकिन उसके कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। सरकार चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही 2200 करोड़ का ऋण ले चुकी है ऐसे में 500 करोड़ के और ऋण से कर्ज 2700 करोड़ रुपये का हो जाएगा।

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