Thursday, October 18, 2018

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पहाड़ के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पहाड़ के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

देहरादून। उत्तराखंड के कई जिलों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। अल्मोड़ा के अभिभावक संघ द्वारा हाईकोर्ट में कई जिले के इंटर काॅलेज और स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। कहीं पर छात्रों के मुताबिक शिक्षक नहीं हैं और कहीं पर प्रवक्ता समेत प्रिंसीपल तक के पद खाली पड़े हुए हैं। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अब सरकार से इसकी रिपोर्ट मांगी है और यह भी पूछा है कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे  शिक्षक अभी भी हड़ताल पर हैं?

गौरतलब है कि राज्य में अपनी मांगों को लेकर शिक्षक, राजकीय शिक्षक संघ के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं। शिक्षकों ने पूरी तरह से साफ कर दिया है कि जबतक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाएंगी वे आंदोलन करते रहेंगे। शिक्षकों के आंदोलन की वजह से छात्रों की पढ़ाई के प्रभावित होने को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा था। 

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यहां बता दें कि एक तो प्रदेश में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है। उसके बावजूद शिक्षक हड़ताल कर रहे हैं। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और कई जिलों के जीआईसी और स्कूलों में शिक्षकों से लेकर प्रवक्ता तक के कई पद खाली पड़े हुए हैं। जीआईसी मछियाड़ चम्पावत में कोई प्रवक्ता नहीं है और जीआईसी पीपली पिथौरागढ़ में 254 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं लेकिन एक भी प्रवक्ता नहीं है। वहीं  जीआईसी रोड़ीपाली पिथौरागढ़ में प्रवक्ता के 10 पदों में से 8 खाली पड़े हुए हैं, अल्मोड़ा के जीआईसी भल्यूटा में प्रवक्ता के 9 पद खाली, बागेश्वर में जीआईसी भन्तोला में 20 विद्यार्थी व 2 शिक्षक हैं।

गौर करने वाली बात है कि हाईकोर्ट ने सरकार को नियमित शिक्षकों की नियुक्ति करने के आदेश दिए थे लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया है। अभिभावक संघ का कहना है कि शिक्षकों के अभाव में छात्र स्कूलों से पलायन करने पर मजबूर हैं। उन्होंने कोई वैकल्पिक इंतजाम करने का भी आग्रह किया है। यहां बता दें कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने वाले शिक्षकों पर भी सख्त दिखाते हुए उन्हें काम पर लौटने को कहा गया था। इस बात को लेकर भी कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है कि क्या शिक्षक अभी भी हड़ताल पर हैं?

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