Friday, April 26, 2019

Breaking News

   भाजपा के संकल्प पत्र में आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा     ||   सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव में ईवीएम और वीवीपैट के मिलान को पांच गुना बढ़ाया    ||    दिल्लीः NGT ने जर्मन कार कंपनी वोक्सवैगन पर 500 करोड़ का जुर्माना ठोंका     ||    दिल्लीः राहुल गांधी 11 मार्च को बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे     ||    हैदराबाद: टीका लगाने के बाद एक बच्चे की मौत, 16 बीमार पड़े     ||   मध्य प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर होंगे सलमान खान, CM कमलनाथ ने दी जानकारी     ||   पाकिस्तान को FATF से मिली राहत, ग्रे लिस्ट में रहेगा बरकरार     ||   आय से अधिक संपत्ति केसः हिमाचल के पूर्व CM वीरभद्र सिंह के खिलाफ आरोप तय     ||   भीमा-कोरेगांव केसः बॉम्बे HC ने आनंद तेलतुंबड़े की याचिका पर सुनवाई 27 तक टाली     ||   हिमाचल प्रदेश: किन्नौर जिले में आया भूकंप, तीव्रता 3.5     ||

बाघों के पुनर्वास को लेकर गलत जानकारी देने पर हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई लताड़, कहा- लानत है सरकारी कार्यालयों पर 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बाघों के पुनर्वास को लेकर गलत जानकारी देने पर हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई लताड़, कहा- लानत है सरकारी कार्यालयों पर 

नैनीताल। राज्य के जिम काॅर्बेट पार्क में जंगली जानवरों के पुनर्वास को लेकर सरकारी अधिकारियों के द्वारा दी गई गलत जानकारी पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। बता दें कि हाईकोर्ट ने काजीरंगा की तर्ज पर कार्बेट नेशनल पार्क में घायल बाघों के पुनर्वास के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाने का आदेश दिया है। गौर करने वाली बात है कि पहले कोर्ट ने कहा था कि अधिकारियों का ज्यादा ध्यान जानवरों से ज्यादा अतिक्रमणकारियों को बचाने पर है लेकिन जब बेजुबान जानवरों का सवाल आता है तो वे खामोश हो जाते हैं। 

गौरतलब है कि कोर्ट को दी गई गलत जानकारी पर अधिकारियों ने कोर्ट से माफी मांगी है। गलत जानकारी देने पर नाराज कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वाले अधिकारी पूरी जानकारी के साथ ही कोर्ट में आएं। बता दें कि हिमालयन युवा ग्रामीण संस्था के द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की है।

ये भी पढ़ें - चमोली के धन सिंह घरिया बने शिक्षकों के लिए मिसाल, अब तक 150 छात्रों की पढ़ाई का उठाया खर्च 


यहां बता दें कि हिमालयन युवा ग्रामीण संस्था द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि जिम काॅर्बेट पार्क के किनारे रहने वाले जानवरों पर अत्याचार करते हैं। हाथियों की आंखें फोड़ने का मामला भी सामने आया था। वहीं कई बाघों की भी हत्या करने का मामला सामने आया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मृत बाघों की बिसरा रिपोर्ट तलब की। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि बिसरा रिपोर्ट उसी दिन लैब में भेज दी जाती है लेकिन कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट से पता चला कि बिसरा रिपोर्ट उसी दिन नहीं भेजी गई थी। गलत जानकारी पर अधिकारियों ने कोर्ट से माफी मांगी। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।

 

Todays Beets: