Monday, June 25, 2018

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राज्य के सीमांत गांव तक पहुंचा इंटरनेट, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सीएम ने बच्चों से की बात,अब विकास की रफ्तार होगी तेज

अंग्वाल न्यूज डेस्क
राज्य के सीमांत गांव तक पहुंचा इंटरनेट, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सीएम ने बच्चों से की बात,अब विकास की रफ्तार होगी तेज

देहरादून। उत्तराखंड को विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ली पहल पर चमोली जिले का सीमांत गांव घेस और हिमनी इंटरनेट से जुड़ गया है। मंगलवार को सीएम ने खुद वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वहां के स्कूली बच्चों से बात की। बच्चे अपने बीच मुख्यमंत्री को देखकर काफी खुश हुए। छोटे बच्चों के बाद सीएम ने चमोली के राजकीय इन्टर काॅलेज घेस के बच्चों से भी बात की। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने वहां की समस्याओं को जल्द दूर करने का भरोसा दिलाया है। 

गौरतलब है कि गांव में बिजली की समस्या के बारे में पता चलने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 महीने के अंदर उस गांव में बिजली की आपूर्ति करा दी जाएगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही उन्होंने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं। बता दें कि 2013 में आई भीषण आपदा के दौरान इस इलाके में बिजली की आपूर्ति बाधित हो गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाके में मधुमक्खी पालन की काफी संभावनाएं हैं और जल्द ही इसके लिए लोगों को विशेषज्ञों की मदद मुहैया कराया जाएगा। बच्चों को इंटरनेट के सकारात्मक उपयोग के बारे में बच्चों को बताते हुए सीएम ने कहा कि इसके जरिए वे किसानों की मदद कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के प्रयासों से घेस गांव को मटर की उन्नत खेती के लिए  जाना जाने लगा है।

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आपको बता दें कि मुख्यमंत्री ने घेस और हिमनी के स्कूलों में के-यान पोर्टेबल मल्टीफंक्शनल(बहुउद्देशीय) डिवाईस भेजी गई है। यह डिवाईस इन्टरनेट से कनेक्ट होकर वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा प्रदान करती है। इसके माध्यम से बाहरी केन्द्रों से शिक्षक घेस और हिमनी के बच्चों को पढ़ा सकते है। इस डिवाईस में एनसीईआरटी द्वारा पहले से तैयार की हुई रिकाॅर्डेड शिक्षण सामग्री भी मौजूद है, जिसे कक्षाओं के समय या कक्षाओं के बाद आवश्यकतानुसार बच्चों को दिखाया जा सकता है। छुट्टियों के समय इस डिवाईस और इंटरनेट के जरिए छात्रों को ज्ञानवर्धक और मनोरंजक कार्यक्रम भी दिखाया जाएगा। 

गौर करने वाली बात यह है कि इस डिवाईस का उपयोग करने के लिए किसी तरह के पर्दे की जरूरत नहीं होती है, यह कक्षा की दीवार को ही पर्दा बना लेता है। इस उपकरण की मदद से दो अलग-अलग गांवों के स्कूलों के बच्चे आपस में बात कर सकते हैं। वहीं विदेशों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी अपने गांव और यहां के बच्चों को संबोधित कर सकते हैं। बता दें कि घेस और हिमनी गांव में सोलर पैनल के जरिए बिजली पहुंचाई गई है। इससे के-यान पोर्टेबल डिवाईस और अन्य आवश्यक उपकरण चार्ज भी हो रहे हैं। 

गौर करने वाली बात है कि ऐसा कहा जाता है कि घेस और हिमनी के आगे कोई भी गांव नहीं है ऐसे में मुख्यमंत्री की पहल से यहां तक इंटरनेट की सुविधा पहुंची है। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले ही इस गांव को आईटी इनेबल्ड बनाने के निर्देश दिए थे। गांव में इन्टरनेट पहुंचाया गया। इंटरनेट पहुंचने के साथ ही गांव में काॅमन सर्विस सेन्टर भी खुल गया है। इंटरनेट की मदद से ग्रामीणों की जिन्दगी में बेहतरी आने की उम्मीद जगी है। इंटरनेट की सुविधा शुरू होने से यहां टेलीमेडीसिन की सेवा भी शुरू हो गई है। कुछ ग्रामीणों ने इस सेवा के जरिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डाॅक्टरों से और पशुपालकों ने विशेषज्ञों की राय ली है। बड़ी बात यह है कि काॅमन सर्विस सेंटर के लिए लैपटाॅप और प्रिंटर सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया है। यहां से ग्रामीणों को आवश्यक प्रमाण-पत्र, टिकट बुकिंग आदि सुविधा भी प्राप्त होगी। 

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