Tuesday, February 19, 2019

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मोबाइल नहीं तो वोट नहीं, 16 गांवों ने लिया थराली विधानसभा उपचुनाव के बहिष्कार का फैसला

अंग्वाल न्यूज डेस्क
मोबाइल नहीं तो वोट नहीं, 16 गांवों ने लिया थराली विधानसभा उपचुनाव के बहिष्कार का फैसला

देहरादून। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए इलाके में बुनियादी सुविधाओं का विकास काफी जरूरी है। उत्तराखंड में थराली विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले इसका नजारा देखने को मिला है। गौर करने वाली बात है कि मोबाइल फोन आज की जिन्दगी में लोगों की जरूरत बन गया है लेकिन चमोली के कई गांव ऐसे हैं जहां आजतक न तो मोबाइल टावर पहुंचा है और न ही मोबाइल। कोई कंपनी मोबाइल टॉवर लगाए भी तो कैसे इन गांवों में अभी तक बिजली लाइन नहीं पहुंची है। इस बात से नाराज होकर इन 16 गांवों के ग्रामीणों ने थराली उपचुनाव का बहिष्कार करने की ठानी है।

गौरतलब है कि थराली सीट पर वहां के विधायक मगनलाल शाह के आकस्मिक निधन के बाद वहां उपचुनाव कराए जा रहे हैं। इस सीट पर चुनाव को लेकर नामांकन पत्र भरे जा चुके हैं और राजनीतिक पार्टियों के द्वारा चुनाव प्रचार जोर-शोर से किया जा रहा है। थराली विधानसभा क्षेत्र के लोग सरकारी उपेक्षा के चलते चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। चमोली जिले के इन लोगों का कहना है कि आज मोबाइल फोन लोगों की जरूरत में शामिल हो गया है लेकिन इन इलाकों में बिजली के खंभे नहीं पहुंचने की वजह से मोबाइल टावर भी यहां नहीं पहुंचा है। 

यहां बता दें कि सरकारी उपेक्षा से आहत सोल क्षेत्र के 16 गांवों के ग्रामीणों ने थराली उपचुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 70 साल बाद भी सोल क्षेत्र की सुध नहीं ली जा रही है। सड़कें आरटीओ के पास नहीं हो पाई हैं।  सोल क्षेत्र के इन 16 गांवों का विद्युतीकरण आज तक नहीं हो पाया है यहां तक की इन इलाकों में कोई डाॅक्टर भी नहीं है। यहां लोगों को इलाज के लिए देहरादून का रुख करना पड़ता है। 


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सोल क्षेत्र देश के अन्य हिस्सों से कटा हुआ है यहां आज तक संचार सुविधाएं नहीं हैं। रतगांव, कोलपूणी, बूगां एवं धुधुती आदि गांवों में बिजली नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बूंगा और डूंग्री में डाक्टर नहीं हैं। लोगों ने कहा कि कई बार सरकार से बिजली, सड़क आदि की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। उधर, निर्वाचन अधिकारी/उपजिलाअधिकारी थराली परमानंद राम ने बताया कि सोल के लोगों के चुनाव बहिष्कार की उनके पास कोई सूचना नहीं है। 

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