Saturday, July 21, 2018

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अब आधे घंटे पहले मिलेगी बादल फटने की जानकारी, मौसम विभाग स्थापित करेगा राडार

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अब आधे घंटे पहले मिलेगी बादल फटने की जानकारी, मौसम विभाग स्थापित करेगा राडार

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम की तल्खी से परेशान लोगों को विभाग जल्द ही एक बड़ी राहत दे सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि अब लोगों को आधे घंटे पहले ही बादल फटने की चेतावनी आधे घंटे पहले जारी कर देगा। बारिश के आंकलन और राडार के आंकड़ों के आधार पर मौसम विभाग यह चेतावनी जारी करेगा। अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित होने से जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा। उत्तराखंड में यह खासा फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि यहां बादल फटने की घटनाएं बहुत ज्यादा होती हैं। 

गौरतलब है कि जब किसी भी क्षेत्र विशेष में एक घंटे के दौरान 100 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश होती है, तो इस घटना को बादल फटना कहते हैं। इतनी अगर किसी भी क्षेत्र में होती है तो वहां तबाही मचना तय है। बादल फटने की घटना से होने वाले जानोमाल के नुकसान को कम करने के लिए मौसम विभाग ने अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया है। इस सिस्टम के जरिए बादल फटने की भविष्यवाणी आधे घंटे पहले तक की जा सकती है।

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यहां बता दें कि राज्य में 25 ऑटोमैटिक वेदर सिस्टम और रेन गेज लगे हैं। इस सिस्टम से मौसम विभाग को हर 15 मिनट में बारिश का डाटा मिलता है। इसके अलावा राडार के जरिए बादलों की स्थिति पर नजर रखी जाती है। बादल फटने की घटना के बारे में मौसम विभाग भविष्यवाणी करने से पहले यह देखेगा कि किसी भी क्षेत्र में आधे घंटे में 50 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश होती है और इसमें कोई बदलाव नहीं आता है तो ऐसे में मौसम विभाग तुरंत अलर्ट जारी कर देगा। 

गौर करने वाली बात है कि अभी तक राज्य में बादलों की सही स्थिति की जानकारी देने वाला एक भी राडार नहीं है। ऐसे में मौसम विभाग को बादल देखने के लिए दिल्ली और पटियाला के राडार पर निर्भर रहना पड़ता है। बादलों के बीच में होने की स्थिति में उत्तराखंड की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है जिससे मौसम को लेकर अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। इसको देखते हुए प्रदेश में 3 राडार लगाने का काम शुरू किया गया है। मुक्तेश्वर और मसूरी के बीच जगहों की पहचान कर ली गई है जहां राडार लगाना है। तीसरा राडार चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा के बीच स्थापित किया जाएगा। सरकार की तरफ से इसका टेंडर किया जा चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2020 तक ये तीनों राडार काम करना शुरू कर देंगे। 

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