Friday, September 22, 2017

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देहरादून के इस जेल में कैदी खुद करते हैं एक दूसरे का उपचार, ‘प्राणिक हीलिंग उपचार पद्धति’ ने बदला जीवन

अंग्वाल न्यूज डेस्क
देहरादून के इस जेल में कैदी खुद करते हैं एक दूसरे का उपचार, ‘प्राणिक हीलिंग उपचार पद्धति’ ने बदला जीवन

देहरादून। आमतौर पर बीमार होने पर आपका इलाज डाॅक्टर करते हैं लेकन देहरादून के जिला कारागार में कैदियों का इलाज कैदी ही कर रहे हैं। जी हां, यहां का सुद्धोवाला जिला कारागार सिर्फ उत्तराखंड में ही नहीं बल्कि पूरे देश में मॉडल जेल के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। यहां करीब ढाई साल पहले जेल प्रशासन की ओर से ‘प्राणिक हीलिंग उपचार पद्धति’ के तौर पर कैदियों के उपचार की व्यवस्था शुरू की गई थी। आज इसने जेल की सूरत बदल कर रख दी है। अब बीमार होने पर कैदी चिकित्सकों का इंतजार करने के बजाय स्वयं ही उसका इलाज कर देते हैं। 

कैदी ले रहे उपचार की शिक्षा

गौरतलब है कि देहरादून में होने की वजह से इस जेल को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इस जेल में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधी भी बंदी हैं। इस कारण यह कारागार जेल प्रशासन के लिए सिरदर्द बना रहता था लेकिन जब से यहां के कैदियों ने प्राणिक हीलिंग उपचार पद्धति को व्यवहार में उतारा है जेल के भीतर एक सौहार्दपूर्ण माहौल बन गया है। आपको बता दें कि इस उपचार पद्धति की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। शुरू में कैदियों ने इसमें रूचि नहीं ली लेकिन धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ने लगी और आज करीब 18 क्ैदी यहां शिक्षा ले रहे हैं। जेल में प्रतिदिन सुबह नौ से 11 बजे तक कक्षा संचालित की जाती है।  

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जेल प्रशासन की भी कर रहे मदद

सुद्धोवाला जेल में फिलहाल 1150 कैदी हैं जिनमें से करीब 650 कैदियों ने एक माह का कोर्स पूरा कर लिया है। अब ये कैदी प्राणशक्ति (तरंग रूपी ऊर्जा) के माध्यम से बीमार पड़ने वाले कैदियों का उपचार कर रहे हैं। शायद ही ऐसी कोई बीमारी होगी, जिसका इलाज इनके पास न हो। ऐसा नहीं कि प्रशिक्षित कैदी सिर्फ बीमार कैदियों को ही उपचार देते हैं, जरूरत पड़ने पर जेल प्रशासन के कर्मी भी इनकी सहायता लेते हैं।


हर कैदी खुद में विशेष

आपको बता दें कि देहरादून के इस जेल में बंद कैदियों में से एक गोपाल उपचार के तरीके में इतना माहिर हो चुका है कि वह प्राणशक्ति के द्वारा व्यक्ति के अंदर छिपी बीमारी का भी पता लगा सकता है। गोपाल सात माह पूर्व देहरादून की एक महिला के बांझपन का सफल इलाज कर चुका है।

-दुष्कर्म के जुर्म में सात साल की सजा काट रहे बच्चा बैरक के कैदी माधव ने प्राणशक्ति के जरिए कई लोगों के आंखों की रोशनी लौटाई है। आज उन्हें चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती।

-दुष्कर्म के जुर्म में दस साल की सजा काट रहा सूरज नेगी पानी चार्ज के लिए मशहूर है। वह प्राणशक्ति के जरिए पानी को चार्ज करता है। इससे पानी में बैक्टीरिया व नकारात्मक शक्तियां खत्म हो जाती हैं। यह पानी शरीर के लिए लाभकारी होता है। यही कारण है कि जेल प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी पीने के लिए सूरज से रोजाना पांच-पांच लीटर पानी चार्ज कराते हैं। 

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