Monday, April 23, 2018

Breaking News

   मायावती का पलटवार, कहा- सत्ता के अहंकार में जनता को मूर्ख समझ रही BJP; शाह के गुरू मोदी ने गिराया पार्टी का स्तर     ||   चीन के स्‍पर्म बैंक ने रखी अनोखी शर्त, सिर्फ कम्‍युनिस्‍टों का समर्थन करने वाले ही दान कर सकेंगे स्‍पर्म     ||   CBSE पेपर लीक: हिमाचल से टीचर समेत 3 गिरफ्तार, पूछताछ में हो सकता है अहम खुलासा     ||   बिहार: शराब और मुर्गे के साथ गश्त करने वाली पुलिस टीम निलंबित     ||   रेलवे की 90 हजार नौकरियों के आवेदन की आज लास्ट डेट, दो करोड़ 80 लाख कर चुके हैं अप्लाई     ||   कांग्रेस में बड़ा बदलाव: जनार्दन द्विवेदी की छुट्टी, गहलोत बने नए AICC महासचिव     ||   भारत ने चीन की तिब्बत सीमा पर भेजे और सैनिक, गश्त भी बढ़ाई     ||   अब कॉल सेंटर की नौकरियों पर नजर, अमेरिकी सांसद ने पेश किया बिल     ||   ब्लूमबर्ग मीडिया का दावा, 2019 छोड़िए 2029 तक पीएम रहेंगे नरेंद्र मोदी     ||   फेसबुक को डेटा लीक मामले से लगा तगड़ा झटका, 35 अरब डॉलर का नुकसान     ||

उत्तराखंड के गढ़वाल में बड़े भूकंप की चेतावनी, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

अंग्वाल न्यूज डेस्क
उत्तराखंड के गढ़वाल में बड़े भूकंप की चेतावनी, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

देहरादून। वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में एक बड़े भूकंप की आशंका जताई है। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8 बताई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में सात सौ सालों से बड़ा भूकंप नहीं आया है, जिस कारण बड़े भूकंप की आशंका व्यक्त की गई है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि समूचा उत्तर भारत इस भूकंप की चपेट में आएगा और सबसे अधिक नुकसान तराई के क्षेत्रों में होगा। बता दें कि भूकंप वैज्ञानिकों की कार्यशाला में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई है। 

जमीन के अंदर ऊर्जा संचित

गौरतलब है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि गढ़वाल हिमालय में 8 रिक्टर स्केल से ज्यादा बड़े भूकंप के लायक ऊर्जा जमा हो गई है। हालांकि यहां हल्के भूकंप आ रहे हैं लेकिन पूरी ऊर्जा नहीं निकल रही है। ऐसे में यहां बड़े भूकंप का खतरा निरंतर बना हुआ है। बता दें कि वाडिया भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक जेजी पेरूमल ने अपने अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि इस क्षेत्र में वर्ष 1344 से अभी तक बड़ा भूकंप नहीं आया। 

ये भी पढ़ें - विकास और पर्यावरण दोनों की दोस्ती जरूरी, लेकिन पर्यावरण संरक्षण एक चुनौती -त्रिवेंद्र सिंह रावत


ज्यादा नुकसान की आशंका

आपको बता दें कि 1344 में आए भूकंप का केंद्र रामनगर के पास था जिसका असर पंजाब तक होने के प्रमाण मिले हैं। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में बताया कि 1905 में कांगड़ा में जो भूकंप आया था यदि वह आज आए तो 10 लाख लोगों की मौत होगी। यदि इसी स्केल का भूकंप उत्तराखंड में आए तो मौत का आंकड़ा इससे भी ज्यादा होगा क्योंकि उत्तराखंड में जनसंख्या घनत्व हिमाचल से ज्यादा है।  

Todays Beets: