Thursday, January 17, 2019

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इस राजनेता के बेटे को राजनीति नहीं आई रास, कुटीर उद्योग में तलाशा भविष्य

अंग्वाल न्यूज डेस्क
इस राजनेता के बेटे को राजनीति नहीं आई रास, कुटीर उद्योग में तलाशा भविष्य

देहरादून। आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि नौकरीपेशा वर्ग को छोड़कर ज्यादातर बच्चे अपने पिता के ही परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। व्यापारियों का बेटा हो चाहे डाॅक्टर या राजनीतिज्ञों का, सभी उनके पदचिन्हों पर ही चलते नजर आएंगे। उत्तराखंड के राजनेता और लालकुआं क्षेत्र से विधायक नवीन दुम्का के बेटे शैलेंद्र ने इस परंपरा को तोड़ दिया है। शैलेन्द्र ने राजनीति में जाने के बजाय मशरूम उत्पादन का व्यवसाय चुना। आज महज 8 से 10 किलो मशरूम उगाने वाले शैलेन्द्र ने आने वाले समय में रोजाना 1 से डेढ़ क्विंटल मशरूम के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। 

गौरतलब है कि विधायक नवीन दुम्का के बेटे ने कुटीर उद्योग में बेहतर भविष्य की संभावनाएं तलाशी हैं। बता दें कि लालकुआं क्षेत्र से विधायक दुम्का के 2 बेटे और 2 बेटियां हैं। छोटा बेटा मुकेश बमेटा बंगर खीमा का ग्राम प्रधान है। स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके शैलेंद्र ने पढ़ाई के बाद स्वरोजगार की ठानी। स्वरोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने के बाद उसे मशरूम उत्पादन की योजना पसंद आई। इसके बाद उसने पिछले साल सितंबर में ज्योलीकोट स्थित इंडोडच मशरूम परियोजना में 3 दिनों का मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

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यहां बता दें कि प्रशिक्षण हासिल करने के बाद ही शैलेन्द्र ने एक कमरे में कंपोस्ट भरकर मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। आज वे कंपोस्ट से भरे 75 बैगों से रोजाना करीब 8 से 10 किलो मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। शैलेन्द्र के अनुसार इन मशरूम को वे स्थानीय बाजार में ही बेच देते हैं हालांकि ज्यादा पैदावार होने पर हल्द्वानी की मंडी में जाते हैं जहां उन्हें 80-100 रुपये प्रति किलो तक का भाव आसानी से मिल जाता है। वहीं अगर खुले बाजार में बेचा जाए तो यह 200 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिकता है।

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