Thursday, August 16, 2018

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पहली बार नीति आयोग के उपाध्यक्ष पहुंचे उत्तराखंड, सरकार ने की ग्रीन बोनस की मांग 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पहली बार नीति आयोग के उपाध्यक्ष पहुंचे उत्तराखंड, सरकार ने की ग्रीन बोनस की मांग 

देहरादून। राज्य सरकार ने पर्यावरणीय सेवाओं के लिए नीति आयोग से ग्रीन बोनस की मांग की है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के सामने हिमालयी राज्य उत्तराखंड के मुद्दे उठाए। पिछले लंबे अरसे से केंद्र सरकार पर बकाया 1500 करोड़ धनराशि के साथ ही पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में सालाना करीब 5000 करोड़ ग्रीन बोनस के भुगतान की जोरदार मांग की है। बता दें कि यह पहला मौका जब नीति आयोग के उपाध्यक्ष उत्तराखंड पहुंचकर सरकार की प्राथमिकताओं जानकारी ली।

केन्द्र से नहीं मिला सहयोग

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री आवास पर उपाध्यक्ष ने शासन के सभी बड़े अधिकारियों से मुलाकात की। बता दें कि 13वें वित्त आयोग समेत केंद्र से विभिन्न विकास योजनाओं के लिए उत्तराखंड को 1500 करोड़ से ज्यादा की धनराशि मिलनी बाकी है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के विकास के लिए पिछले सालों में केन्द्र द्वारा जो राशि देने का वादा किया गया था वह अभी तक नहीं मिल पाया है।

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पीएमजीएसवाई से जुड़ें इलाके


आपको बता दें कि पर्यावरण को नुकसान के कारण राज्य की कुल जलविद्युत क्षमता का महज 20 फीसद भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे राज्य में 40 हजार करोड़ का निवेश प्रभावित हो रहा है। इस वजह से राज्य ने केन्द्र से सालाना 5000 करोड़ रुपये के ग्रीन बोनस की मांग की है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार पर्यटन, जैविक खेती व उद्यानिकी आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहती है और इसके लिए दूरस्थ इलाकों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़ने की भी मांग की है। 

वनभूमि हस्तांतरण अधिकार मिले

नीति आयोग के उपाध्यक्ष के सामने वन भूमि हस्तांतरण के चलते परियोजनाओं में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया गया। वन सचिव अरविंद ह्यांकी ने बताया कि केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी के लिए वृक्षारोपण में छूट मिलती है। इस तर्ज पर राज्य की योजनाओं के लिए भी उन्हें छूट दी जाए। नवंबर, 2016 के बाद बंद किए गए एक हेक्टेयर तक और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पांच हेक्टेयर तक वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार बहाल किया जाए।  

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