Saturday, October 20, 2018

Breaking News

   सेना हर चुनौती से न‍िपटने के ल‍िए तैयार, सर्जिकल स्ट्राइक भी व‍िकल्‍प: रणबीर सिंह    ||   BJP विधायक मानवेंद्र ने बदला पाला, राज्यवर्धन बोले- कांग्रेस ने 70 साल में मंत्री नहीं बनाया    ||   सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर छिड़ी जंग, हिरासत में 30 प्रदर्शनकारी    ||   विवेक तिवारी हत्याकांडः HC की लखनऊ बेंच ने CBI जांच की मांग ठुकराई    ||   केरलः अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने सबरीमाला फैसले के खिलाफ HC में लगाई याचिका    ||   कोलकाताः HC ने दुर्गा पूजा आयोजकों को ममता के 28 करोड़ देने के फैसले पर रोक लगाई    ||    रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस मिसाइल पर भारत की डील    ||   नार्वेः राजधानी ओस्लो में आज होगा शांति के नोबेल पुरस्कार का ऐलान    ||   अंकित सक्सेना मर्डर केसः ट्रायल के लिए अभियोगपक्ष के 2 वकीलों की नियुक्ति    ||   जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉफ्रेंस के दो कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या, मरने वालों में एक MLA का पीए भी     ||

शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में अजीबोगरीब मामला आया सामने, 21 सालों से एक ही प्रमाण पत्र पर कार्यरत दो शिक्षक

अंग्वाल न्यूज डेस्क
शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में अजीबोगरीब मामला आया सामने, 21 सालों से एक ही प्रमाण पत्र पर कार्यरत दो शिक्षक

देहरादून। राज्य में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक बनने वालों का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। इसमें एक ही प्रमाण पत्र के आधार पर दो शिक्षक 21 सालों से नौकरी कर रहे हैं। इन शिक्षकों में से एक तो फिलहाल प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हैं। बता दें कि एसआईटी द्वारा शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच में यह मामला सामने आया है। जांच में मामले की पुष्टि होने के बाद एसआईटी ने रामनगर में तैनात इस शिक्षक के फर्जी होने की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेज दी है।

फर्जी दस्तावेज

गौरतलब है कि राज्य में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद इसकी जांच एसआईटी द्वारा शुरू की गई है। इसमें फर्जी प्रमाणपत्रों वाले 12 शिक्षकों को बर्खास्त भी किया जा चुका है। एसआईटी को यह खबर मिली थी कि रामनगर में राजकीय प्राथमिक विद्यालय थारी में तैनात शिक्षक रामकिशोर के प्रमाण पत्र फर्जी हैं। इसके बाद एसआईटी की तरफ से महीने भर से ज्यादा समय तक की गई जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि यह प्रमाणपत्र राजकीय प्राथमिक विद्यालय छजलैट मुरादाबाद उत्तर प्रदेश में तैनात शिक्षक रामकिशोर के हैं। इसके बाद जांच टीम मुरादाबाद पहुंची तो यहां इस बात की पुष्टि हुई।

ये भी पढ़ें - राज्य के विकास की कवायद तेज, सड़कों से लेकर नदियों तक की स्थिति होगी बेहतर


फिलहाल प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात

आपको बता दें कि जांच टीम की प्रभारी एएसपी श्वेता चैबे ने बताया कि जांच में रामनगर नैनीताल के शिक्षक रामकिशोर के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। इसकी पुष्टि उसके भाइयों ने करते हुए कहा कि राम किशोर का असली नाम नरेश राम है। उनके भाइयों ने यह भी बताया कि उनके भाई का नाम रामकिशोर होने की उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है। अब जांच में खबर की पुष्टि होने के बाद एसआईटी ने शिक्षा विभाग को पूरी रिपोर्ट भेज दी है। बता दें कि रामकिशोर उर्फ नरेश राम को पहली नियुक्ति अल्मोड़ा में 1996 में मिली थी। यहां से उसका ट्रांसफर 2002 में रामनगर हुआ और फिलहाल वे राजकीय प्राथमिक विद्यालय थारी रामनगर में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हैं। 

Todays Beets: