Sunday, May 27, 2018

Breaking News

   कानपुर जहरीली शराब मामले में 5अधिकारी निलंबित     ||   अब जल्द ही बिना नेटवर्क भी कर सकेंगे कॉल, बस Wi-Fi की होगी जरुरत     ||   मौलाना मदनी ने भी की एएमयू से जिन्‍ना की तस्‍वीर हटाने की वकालत     ||   भारत-चीन सेना के बीच हॉटलाइन की तैयारी, LoC पर तनाव होगा दूर     ||   कसौली में धारा 144 लागू, आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर     ||   स्कूली बच्चों पर पत्थरबाजी से भड़के उमर अब्दुल्ला, कहा- ये गुंडों जैसी हरकत     ||   थर्ड फ्रंट: ममता, कनिमोझी....और अब केसीआर की एसपी चीफ अखिलेश यादव के साथ बैठक     ||   मायावती का पलटवार, कहा- सत्ता के अहंकार में जनता को मूर्ख समझ रही BJP; शाह के गुरू मोदी ने गिराया पार्टी का स्तर     ||   चीन के स्‍पर्म बैंक ने रखी अनोखी शर्त, सिर्फ कम्‍युनिस्‍टों का समर्थन करने वाले ही दान कर सकेंगे स्‍पर्म     ||   CBSE पेपर लीक: हिमाचल से टीचर समेत 3 गिरफ्तार, पूछताछ में हो सकता है अहम खुलासा     ||

नैनी झील के अस्तित्व पर मंडराया खतरा, 10 बार पहुंची शून्य के स्तर से नीचे

अंग्वाल न्यूज डेस्क
नैनी झील के अस्तित्व पर मंडराया खतरा, 10 बार पहुंची शून्य के स्तर से नीचे

नैनीताल। सरोवर नगरी के नाम से दुनिया भर में मशहूर नैनीताल के नैनी झील के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। पीने के पानी के लिए झीलों पर बढ़त निर्भरता के कारण इसका जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। पिछले 14 सालों में इस झील का स्तर 10 बार शून्य तक पहुंच गया है। बता दें कि शून्य वह स्थिति होती है जब झील में पानी की उपलब्धता न्यूनतम स्तर से भी नीचे पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति लगातार रहने से झील के सूखने का खतरा बढ़ गया है। 

झील की पानी का स्तर हुआ शून्य

गौरतलब है कि नैनीताल पूरी दुनिया में अपनी झीलों के चलते सरोवर नगरी के नाम से मशहूर है। बता दें कि नैनी झील में 90.99 फीट की सतह से जब पानी का स्तर 12 फीट से नीचे चला जाता है, तब उसे शून्य स्तर माना जाता है। नैनी झील पुनर्जीवीकरण पर आयोजित सेमिनार में सेंटर फॉर इकोलॉजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च (सीईडीएआर) उत्तराखंड ने इस हकीकत को साझा किया है। अगर हालात इसी तरह से रहे तो लोगों को पीने का पानी भी नसीब नहीं होगा। 


ये भी पढ़ें - शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ाः हरिद्वार में तहसील प्रशासन को नहीं मिल रहे शिक्षकों के प्रमाण पत्र, ए...

संरक्षण का कोई उपाय नहीं

यहां बता दें कि सेमिनार में इस बात की भी जानकारी दी गई कि नैनी झील में 1923 और 1980 में ही पानी का स्तर शून्य पर पहुंचा था। बढ़ती आबादी और आने वाले पर्यटकों की पानी की जरूरतों के मद्देनजर आज झील से रोजाना करीब 16 मीलियन लीटर पानी निकाला जा रहा है लेकिन झील के संरक्षण का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण, निर्माण और गंदगी के कारण झील में हर साल करीब 24 सेंटीमीटर गाद जमा होती जा रही है।  

Todays Beets: