Saturday, October 20, 2018

Breaking News

   सेना हर चुनौती से न‍िपटने के ल‍िए तैयार, सर्जिकल स्ट्राइक भी व‍िकल्‍प: रणबीर सिंह    ||   BJP विधायक मानवेंद्र ने बदला पाला, राज्यवर्धन बोले- कांग्रेस ने 70 साल में मंत्री नहीं बनाया    ||   सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर छिड़ी जंग, हिरासत में 30 प्रदर्शनकारी    ||   विवेक तिवारी हत्याकांडः HC की लखनऊ बेंच ने CBI जांच की मांग ठुकराई    ||   केरलः अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने सबरीमाला फैसले के खिलाफ HC में लगाई याचिका    ||   कोलकाताः HC ने दुर्गा पूजा आयोजकों को ममता के 28 करोड़ देने के फैसले पर रोक लगाई    ||    रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस मिसाइल पर भारत की डील    ||   नार्वेः राजधानी ओस्लो में आज होगा शांति के नोबेल पुरस्कार का ऐलान    ||   अंकित सक्सेना मर्डर केसः ट्रायल के लिए अभियोगपक्ष के 2 वकीलों की नियुक्ति    ||   जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉफ्रेंस के दो कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या, मरने वालों में एक MLA का पीए भी     ||

नैनी झील के अस्तित्व पर मंडराया खतरा, 10 बार पहुंची शून्य के स्तर से नीचे

अंग्वाल न्यूज डेस्क
नैनी झील के अस्तित्व पर मंडराया खतरा, 10 बार पहुंची शून्य के स्तर से नीचे

नैनीताल। सरोवर नगरी के नाम से दुनिया भर में मशहूर नैनीताल के नैनी झील के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। पीने के पानी के लिए झीलों पर बढ़त निर्भरता के कारण इसका जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। पिछले 14 सालों में इस झील का स्तर 10 बार शून्य तक पहुंच गया है। बता दें कि शून्य वह स्थिति होती है जब झील में पानी की उपलब्धता न्यूनतम स्तर से भी नीचे पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति लगातार रहने से झील के सूखने का खतरा बढ़ गया है। 

झील की पानी का स्तर हुआ शून्य

गौरतलब है कि नैनीताल पूरी दुनिया में अपनी झीलों के चलते सरोवर नगरी के नाम से मशहूर है। बता दें कि नैनी झील में 90.99 फीट की सतह से जब पानी का स्तर 12 फीट से नीचे चला जाता है, तब उसे शून्य स्तर माना जाता है। नैनी झील पुनर्जीवीकरण पर आयोजित सेमिनार में सेंटर फॉर इकोलॉजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च (सीईडीएआर) उत्तराखंड ने इस हकीकत को साझा किया है। अगर हालात इसी तरह से रहे तो लोगों को पीने का पानी भी नसीब नहीं होगा। 


ये भी पढ़ें - शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ाः हरिद्वार में तहसील प्रशासन को नहीं मिल रहे शिक्षकों के प्रमाण पत्र, ए...

संरक्षण का कोई उपाय नहीं

यहां बता दें कि सेमिनार में इस बात की भी जानकारी दी गई कि नैनी झील में 1923 और 1980 में ही पानी का स्तर शून्य पर पहुंचा था। बढ़ती आबादी और आने वाले पर्यटकों की पानी की जरूरतों के मद्देनजर आज झील से रोजाना करीब 16 मीलियन लीटर पानी निकाला जा रहा है लेकिन झील के संरक्षण का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण, निर्माण और गंदगी के कारण झील में हर साल करीब 24 सेंटीमीटर गाद जमा होती जा रही है।  

Todays Beets: