Thursday, April 26, 2018

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कार्यशाला और जन भागीदारी से होगी प्रदेश में जंगलों की सुरक्षा मुमकिन- त्रिवेन्द्र रावत

अंग्वाल न्यूज डेस्क
कार्यशाला और जन भागीदारी से होगी प्रदेश में जंगलों की सुरक्षा मुमकिन- त्रिवेन्द्र रावत

देहरादून। राज्य में किसानों की हालत बेहतर बनाने के लिए सरकार की तरफ से पूरी कोशिशें की जा रही हैं। इसमें और सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को 10वीं जापान इंटरनेशनल कोआॅपरेशन एसोसिएशन (जायका) राष्ट्रीय कार्यशाला का विधिवत शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा अखरोट की बागवानी एवं खराब हो रहे वनों के सुधारीकरण पर पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। कार्यशाला में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जंगलों की सुरक्षा के लिए व्यापक जनभागीदारी पर जोर दिया। 

गौरतलब है कि इस कार्यशाला के आयोजन पर सीएम ने 13 राज्यों से आए प्रतिनिधियों के साथ भारत सरकार के अधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगलों के संरक्षण एवं संवर्द्धन में कार्यशाला व प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके जरिए विशेषज्ञों के अनुभवों को विभाग की प्रगति के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कार्यशाला के माध्यम से जंगलों की गतिविधियों के संचालन व संरक्षण में सहायता मिलती है।

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यहां बता दें कि राज्य में करीब 11000 वन पंचायतें हैं और  इन सभी को जायका की तरफ से आर्थिक मदद भी दी जाती है। हिमालयी क्षेत्र होने की वजह से यहां भूक्षरण की संभावना काफी रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान इंटरनेशनल कोआॅपरेशन एसोसिएशन (जायका) द्वारा दी जा रही तकनीकी सहयोग से भू क्षरण को रोकने में काफी मदद मिलेगी। जायका की योजनाओं के जरिए वन सरंक्षण, भू-क्षरण रोकने तथा मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार व मिट्टी में खनिजों की कमी को पूरा किया जा सकेगा।

 


गौर करने वाली बात है कि मुख्यमंत्री ने गर्मियों के दौरान जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ इसमें सामाजिक सहयोग पर भी जोर दिया। सीएम ने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में जंगलों के प्रति अपनापन और उसकी रक्षा का अलख जगाना होगा। उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों को स्कूलों में जाकर बच्चों को जंगलों की रक्षा के गुर बताने चाहिए।  इसके साथ ही प्रदेश की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए नदियों के जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया गया है। 

 

सीएम ने कहा कि दून में रिस्पना नदी के उद्धार के लिए उसके उद्गम से लेकर आखिरी छोर तक पेड़ों को लगाने और उसकी सुरक्षा के लिए जनभागीदारी के लिए अभियान चलाया जाएगा। कार्यशाला में आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए वन मंत्री डाॅक्टर हरक सिंह रावत ने कहा कि जंगल प्रदेश की सस्कृति से जुड़ी हुई है। ऐसे मंे इसकी रक्षा करना राज्य के सभी लोगों की जिम्मेदारी है। 

 

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