Monday, March 25, 2019

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राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते पिटते और शहीद हो रहे हैं भारतीय जवान , देखिए एक नजर में

अंग्वाल न्यूज डेस्क
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते पिटते और शहीद हो रहे हैं भारतीय जवान , देखिए एक नजर में

नई दिल्ली । भारत में अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले के बाद एक बार फिर से देश की जनता राजनीतिक दलों के प्रति अपनी गुस्सा जाहिर कर रही है। लोगों का कहना है कि राजनीतिक दल घाटी में लोगों को खुश करने के लिए कड़ी कार्यवाही करने से डरती हैं, जिसके चलते कभी घाटी में सेना के जवानों को सरेआम पीटा जाता है तो कभी पुलवामा में हुए आतंकी हमलों में सेना के जवानों को अपना बलिदान देना पड़ता है। सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान के खिलाफ अपना गुस्सा उतारने के साथ ही अपने राजनेताओं की आतंकियों को खत्म करने की इच्छाशक्ति पर भी सवाल उठा रहे हैं। इस सब के बीच कई ऐसे वीडियो फिर से सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं, जिसमें घाटी के स्थानीय युवक कहीं जवानों की सरेआम पिटाई कर रहे हैं तो कहीं हाथों में पत्थर लिए घाटी के युवा सुरक्षा बलों पर पथराव कर रहे हैं। 

बता दें कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पहले सड़क पर आईईडी बिछे होने की पूरी जांच हुई थी, लेकिन उस वाहन की जांच नहीं हो पाई थी, जिसमें विस्फोटक भरके आत्मघाती ने कार को सेना के वाहनों से टकरा मारी। असल में कुछ साल पहले पुलिस बेरिकैडिंग के दौरान दो बैरिकेडिंग तोड़कर जा रहे एक शख्स को जवान ने गोली मार दी थी, जिसके बाद मुफ्ती सरकार ने सुरक्षाबलों की वाहनों की तलाशी को लोगों को परेशान करना बताया था। इसके बाद से घाटी के कई हिस्सों में वाहनों की जांच हल्की हुई। उस घटना में शामिल जवान इस समय सजा काट रहा है, ऐसे में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते नेता लोगों को खुश करने के लिए सुरक्षा में चूक होने देते हैं।

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सड़क पर तैनात जवानों की लात-धूसों से पिटाई

पुलवामा में आतंकी हमले के साथ ही एक बार फिर से घाटी का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें घाटी में तैनात सुरक्षाकर्मियों को कई लोग पीटते नजर आ रहे हैं। ये लोग हथियारों से लैस और ईवीएम मशीनें लेकर जा रहे भारतीय जवानों की लात धूसों से पिटाई करते हैं, लेकिन हाथ बंधे होने के चलते सेना के जवान चुपचाप इन लोगों की मार खाते हैं।  

आतंकियों को बचाने के लिए पथराव


पिछले सालों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑल आउट के दौरान जवानों द्वारा की जा रही कार्रवाई और आतंकियों को बचाने के लिए घाटी के पत्थर गैंग द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की घटनाएं भी एक बार फिर से सोशल मीडिया में वायरल हो रही है, जिसमें कहा जा रहा है , भारतीय राजनीतिक दलों की कमजोर इच्छाशक्ति के चलते हमारे जवानों को मार खानी पड़ती है। 

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आतंकियों को मासूम भटके हुआ बताया था

इस सब के बीच जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का एक बयान भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह घाटी के आतंकियों को भटके हुए मासूम युवा बता रही हैं। महबूबा ने अपने एक बयान में कश्मीर में युवाओं के आतंकी बनने की घटनाओं को परोक्ष रूप से जायज ठहराया। मैंने हमेशा कहा है कि स्थानीय आतंकी भी इसी धरती के बेटे हैं। हमें उन्हें बचाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा इस बात पर भरोसा है कि जम्मू कश्मीर में सिर्फ हुर्रियत को ही नहीं बल्कि उन लोगों को भी साथ जोड़ा जाना चाहिए जिन्होंने बंदूकें थाम ली हैं लेकिन इस समय नहीं।  उन्होंने कहा कि इसके लिए एक कदम आगे बढ़ते हुए हुर्रियत समेत सभी संबधित पक्षों से बातचीत करनी होगी। महबूबा ने कहा था कि 2014 के चुनाव से पहले इसी तरह कांग्रेस ने अफजल गुरु को फांसी दे दी थी। वह समझते थे कि उन्हें इसी तरह से कामयाबी मिलेगी। अब भाजपा भी वही दोहरा रही है। आज उन्होंने कन्हैया, उमर खालिद के अलावा जम्मू-कश्मीर के 7-8 छात्रों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है।

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